संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। जिला महिला अस्पताल में सीएमएस व डॉक्टर के बीच हुए विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सीएमएस पर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने और न देने पर नौकरी न करने देने का आरोप लगने के मामले की जांच अपर निदेशक स्वास्थ्य को सौंपी गई है।
जांच में दोषी पाए जाने पर सीएमएस और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। वहीं विवाद की जड़ कही जाने वाली महिला चिकित्सक को वापस सीएचसी चरखारी भेजा गया है।
जिला महिला अस्पताल में तैनात सर्जन डॉ. एसके वर्मा तीन दिन के अवकाश पर गए थे। अस्पताल में प्रसव और सीजर ऑपरेशन प्रभावित न हो, इसको लेकर सीएमओ ने सीएचसी चरखारी में तैनात डॉ. गीतांजलि को महिला अस्पताल में संबद्ध कर दिया था। डॉ. एसके वर्मा के वापस ड्यूटी पर आने के बाद भी महिला डॉक्टर को चरखारी न भेजे जाने को लेकर 31 जनवरी की रात महिला अस्पताल में सीएमएस डॉ. एसपी सिंह व डॉक्टर के बीच विवाद हो गया था।
ब्लडप्रेशर बढ़ने से डॉक्टर की हालत बिगड़ गई थी। डॉक्टर ने सीएमएस पर 50 हजार रुपये प्रतिमाह मांगने अन्यथा नौकरी न करने देने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। मामला सुर्खियों में आने के बाद विभागीय उच्चाधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशाराम ने बताया कि सीएमएस और डॉक्टर के बीच हुए विवाद की जांच एडी स्वास्थ्य कर रहे हैं।
डॉक्टर के अवकाश पर रहने के दौरान तैनात की गई महिला डॉ. गीतांजलि को वापस चरखारी भेजा गया है। अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
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विवाद के बाद अस्पताल में कम पहुंची आशा बहुएं
महोबा। सीएमएस और डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद शुक्रवार को महिला अस्पताल में कम संख्या में आशा बहुएं पहुंची। प्रसव को लेकर अधिकतर समय अस्पताल में ही नजर आने वाली आशाएं गायब रहीं। कई प्रसूताएं बिना आशा बहुएं के अस्पताल पहुंचीं। विवाद के बाद आशा बहुओं ने डीएम मृदुल चौधरी को शिकायती पत्र देकर अस्पताल में भ्रष्टाचार के खेल को उजागर किया था। इसके बाद शुक्रवार को अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारी अपनी-अपनी ड्यूटी करते नजर आए। सीएमएस कर्मचारियों को सुविधा शुल्क की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते रहे।