महोबा। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में चहेते लाभार्थियों को दोहरी किस्त देकर 1.34 करोड़ रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग व गबन के मामले में सेवानिवृत्त परियोजना अधिकारी समेत 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद आवास योजना गड़बड़ी की आशंका को लेकर जांच के दायरे में आ गई है। अब तक स्वीकृत हुए 14,601 पीएम आवासों की जांच होगी। अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे व प्रभारी डूडा जुबैर बेग ने बताया कि लाभार्थियों को दी गई धनराशि व पात्रता की जांच के लिए जल्द ही समिति गठित की जाएगी। यदि मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो कई और चेहरे बेनकाब होंगे।
जिले के शहरी इलाके में नगर पालिका महोबा व चरखारी और नगर पंचायत कुलपहाड़, कबरई व खरेला में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर बड़ा खेल हुआ। केंद्र व प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल आवास योजना से वर्ष 2016 से अब तक शहरी इलाके में कुल 14,601 आवास स्वीकृत हुए। जिसमें दस हजार लाभार्थियों को प्रथम किस्त, 6,386 को दूसरी किस्त व चार हजार लोगों को तीसरी किस्त दी गई। इस बीच 93 लाभार्थियों को दो-दो बार धनराशि भेजे जाने पर 1.34 करोड़ रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया। आवास योजना की प्रक्रिया का संचालन करने के जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को सौंपी गई थी। तैनात कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध होने और गबन का मामला उजागर होने पर कोतवाली में 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
एडीएम नमामि गंगे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और वसूली को पत्र लिखा गया है। आवास योजना का कार्य बाधित न हो इसके लिए कंपनी और सूडा विभाग लखनऊ को नवीन तैनाती के लिए लिखापढ़ी की जा रही है। बताया कि जिले के शहरी इलाके में अब तक योजना से बने आवासों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही समिति बनाई जाएगी। जो संपूर्ण प्रक्रिया की गहन जांच करेगी। इससे अपात्रों को दिए गए लाभ की हकीकत सामने आएगी और पात्र गरीबों को लाभ मिलेगा। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आया अपात्रों को लाभ दिलाने वाला रैकेट
महोबा। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में लाभार्थियों के चयन को लेकर जिले के महोबा और खरेला शहरी क्षेत्र हमेशा चर्चित रहे हैं। तीन माह पहले सुविधा शुल्क वसूलकर अपात्रों को आवास स्वीकृत करके पात्रों का हक डकारने का मामला आने पर डीएम सत्येंद्र कुमार ने चार कर्मियों को हटा दिया था। इसके पहले डूडा कार्यालय में तैनात कर्मियों से साठगांठ कर शहर में आवास दिलाने का ठेका लेने वाले एक युवक को पकड़ा भी गया था लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
कई बार किया आवेदन, नाम भी आया पर नहीं मिला आवास
महोबा। नगर पंचायत खरेला में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की सर्वाधिक संख्या के बाद भी गरीबों को वंचित करने का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। पात्रता सूची में शामिल दो लाभार्थियों ने वाद दायर कर चयन के बाद नाम हटाने को चुनौती दी थी। जिन्हें कोर्ट के आदेश बाद भी लाभ नहीं मिला। खरेला निवासी मुन्नी पत्नी हसनू और राजिया पत्नी चतुर्भुज ने बताया कि उन्होंने आवास के लिए कई बार आवेदन किए। उनका नाम सूची में आया लेकिन नाम में सफेदा लगाकर गायब कर दिया गया। सूचना के अधिकार अधिनियम से जानकारी मांगी गई तो इसका खुलासा हुआ। जिसके बाद वह हाईकोर्ट जाने को मजबूर हुए। भूमिहीन लाल बहादुर कहार और उसकी पत्नी ममता दो-दो बार आवेदन चार साल में कर चुकी लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी तरह रायसिंह मोहल्ला निवासी संतोष अहिरवार ने बताया कि घर में वेबा वृद्ध मां कच्चे मकान में रहती थीं। दिल्ली में मजदूरी करके मां और परिवार का गुजारा चला रहा। चार साल पहले बारिश से मकान ढह गया। मां और बच्चे दूसरे के मकान में रहते हैं। आवास को आवेदन कई बार किया फिर भी आवास अब तक नहीं मिला है।