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1,06,900 किसानों को नहीं मिला क्लेम

Mon, 06 Apr 2015 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
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जिले में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के बाद आई तबाही ने किसानाें को कहीं का नहीं छोड़ा है। फसल की बर्बादी से अन्नदाता जहां खुद रोजी रोटी के लिए मोहताज हो गया है, वहीं अब बेटियाें के हाथ पीले करने और कर्ज की अदायगी की चिंता खाए जा रही है। प्रकृति की मार से परेशान किसानों को अभी तक आर्थिक सहायता तक नहीं मिली है। किसानाें को बीमा राशि कब मिलेगी, यह भी उन्हें पता नहीं है। खरीफ की फसल के लिए जिले में एक लाख छह हजार 900 किसानाें ने रबी की फसल का बीमा कराया था। लेकिन एक भी किसान को प्रीमियम के तौर पर धनराशि नहीं दी गई।
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जिले में रबी की दलहनी और तिलहनी 90 फीसदी फसल का नुकसान हुआ है। जबकि प्रशासन भारी नुकसान मान रहा है। इसी तरह गेहूं की फसल का भी 50 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जबकि प्रशासन 20 से 30 प्रतिशत ही नुकसान मान रहा है। इसके बाद भी उन्हें क्षतिपूर्ति की धनराशि नहीं मिल रही है। जिससे किसानाें के सामने रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं। तमाम किसान बच्चाें का पेट भरने के लिए पलायन कर गए। इफको टोक्यो कंपनी द्वारा तत्कालीन बीमा राशि देने का पालन नहीं हो रहा है।

नुकसान का नहीं हुआ आंकलन
जिले में एक लाख छह हजार 900 किसानाें ने केसीसी बनवाए थे। जिससे सभी किसानों का चने की फसल पर पांच प्रतिशत और गेहूं की फसल पर 5.6 प्रतिशत प्रीमियम कटा था। प्रीमियम की धनराशि इफको टोक्यो बीमा कंपनी को प्राप्त हुई। लेकिन रबी की फसल में भारी नुकसान के बाद भी अभी तक बीमा कंपनी बीमित किसानाें के नुकसान का आंकलन नहीं कर पाई है।
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इफको टोक्यो बीमा कंपनी क्षति के हिसाब से भुगतान करेगी। खरीफ की फसल का बीमा क्लेम बैकाें में आ गया है। रबी की फसल की अभी तक क्रॉप कटिंग नहीं हो सकी है, पूरी क्रॉप कटिंग होने के बाद रबी की फसल का भी मुआवजा दिया जाएगा।
रूपेश दीक्षित, जिला प्रतिनिधि इफको टोक्यो।

गेहूं की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 11 हजार 982 और चने की बीमित राशि 15 हजार 282 रुपये प्रति एकड़  के हिसाब से दी जाएगी। इसके लिए इफको बीमा कंपनी सर्वे कर रही है। सर्वे पूरा होने के बाद किसानाें को बीमा राशि कंपनी मुहैया कराएगी।
- आरपी चौधरी उप निदेशक कृषि, सह नोडल अधिकारी फसल बीमा संबंधी मामले।

किसानों को खरीफ फसल का मुआवजा 3.77 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ है। जो अप्रैल के पहले सप्ताह में बीमा कंपनी द्वारा इलाहाबाद बैंक में भेजी जानी थी। संभवत: आ गई होगी। इसकी जानकारी कराकर जल्द से जल्द किसानों को बीमा राशि का लाभ दिलाया जाएगा।
जेके धींगरा, लीड बैंक मैनेजर

केस 1
ग्राम चांदो निवासी रामदेव ने बताया कि ओलावृष्टि और अति वृष्टि से बर्बाद हुई रबी की फसल का आज तक मुआवजा नहीं मिला। जबकि खेत में बोई गई मटर, चना और गेहूं की फसल शत प्रतिशत नष्ट हो गई है। आज तक बीमा क्लेम की धनराशि का इंतजार कर रहे हैं।

केस 2
समद नगर निवासी फूल सिंह यादव ने बताया कि उसने अपने खेत में मसूर और चने की फसल बोई थी। जो ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई। लेकिन लेखपाल ने अभी तक तमाम खेतों का सर्वे नहीं किया है।

केस 3
बसौरा निवासी वजीर मंसूरी ने बताया कि उसने चना, गेहूं, मटर और लाही की बुवाई की थी। लेकिन फसलें शत प्रतिशत बर्बाद होने के बाद भी अभी तक मुआवजे के नाम पर धेला नहीं मिला। कब तक मिलेगा, कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।

समस्या- रबी के सीजन में खेत बटाई पर लिया था। लेकिन बर्बाद फसल के मुआवजे की चेक खेत मालिक को मिल गई है।
-अभिषेक सोनी (राठ)
समाधान- नियमानुसार खेत मालिक को ही चेक दी जाती है। इसलिए खेत मालिक से आपसी पंचायत के जरिए नुकसान हुई फसल का पैसा ले सकते हैं।
- प्रबुद्ध सिंह, उप जिलाधिकारी सदर।

समस्या- इलाहाबाद बैंक खरेला से एक लाख रुपये का किसान क्रेेडिट कार्ड बना है। 20 बीघा खेत में मटर की फसल बोई थी। जो ओलावृष्टि और बारिश में बर्बाद हो गई। बीमा कंपनी बैंक से बीमा प्रीमियम लगभग 2,200 रुपये काट रही है। बीमा की धनराशि कब तक और कितनी मिलेगी?
-बालेंद्र सिंह (खरेला)
समाधान- बीमा की धनराशि क्रॉप कटिंग के बाद दी जाती है। कहां किस क्षेत्र में कितना नुकसान है इसकी जानकारी प्रशासन द्वारा भेजी जाती है। इसके बाद किसानाें को बीमा देने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। तकरीबन डेढ़ दो महीने बाद ही किसानाें को बीमा की राशि मिल सकेगी।
रूपेश दीक्षित जिला प्रतिनिधि इफको टोक्यो।
समस्या- एसबीआई कुलपहाड़ से 3.80 लाख रुपये का केसीसी बना है। खरीफ में बोई गई उर्द की फसल बर्बाद हो गई थी और रबी के सीजन में मटर की फसल भी बर्बाद हो गई। लेकिन अभी तक बीमा का लाभ नहीं मिला है। जबकि लगातार प्रीमियम काट लिया जाता है।
- श्याम किशोर (कुलपहाड़)
समाधान- खरीफ की फसल का बीमा एक सप्ताह में या जल्द से जल्द किसानाें को मिल जाएगा। प्रक्रिया चल रही है।
रूपेश दीक्षित जिला प्रतिनिधि इफको टोक्यो।

समस्या- खेत में बोई गई रबी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। बीमा कंपनी की ओर से अभी तक बर्बाद फसल का सर्वे नहीं कराया गया है। फसल का बीमा किस हिसाब से मिलेगा। इलाहाबाद बैंक महोबा से बने एक लाख के केसीसी से और साधन सहकारी समिति पचपहरा से प्रीमियम का पैसा काटा जा रहा है।
- भगत सिंह (बारात पहाड़ी)
समाधान- साधन सहकारी समिति और बैंक खाता सहित दोनों खातों में बीमा की राशि प्राप्त होगी। बीमा कंपनी ने अपने एक प्रतिनिधि को कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ भेजकर सर्वे कराया है। कृषि विभाग के सर्वे और क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट के आधार पर बीमा की धनराशि किसानाें को दी जाएगी।
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