‘बिन मांगे स्कूटी, लैपटॉप व स्मार्टफोन मिले, मांगे मिले न रोजगार’
फरेंदा (महराजगंज)। किसी समय गरीब-किसान व मजदूरों का जीवन बदलने के नाम पर चुनाव लड़े जाते थे। अब युवाओं की तकदीर बदलने के नाम पर लड़े जा रहे हैं। चुुनाव आने की आहट से ही युवाओं के लिए वादों की भरमार होती है। इस बार भी सियासी दलों के लोग नकद भुगतान, स्कूटी, लैपटॉप, टैबलेट व स्मार्टफोन जैसे वादों के साथ मैदान में उतर रहे हैं। लेकिन, युवा खुद के लिए रोजगार व शिक्षा की सुगमता का सपना देख रहे हैं।
युवाओं के भीतर मायूसी है कि कोई भी राजनीतिक दल युवाओं को रोजगार देने की कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं। युवाओं से बातचीत में पता चला कि लैपटॉप, टैबलेट व स्मार्टफोन की बात सभी दल कर रहे हैं लेकिन, रोजगार देने का वादा कोई दल नहीं कर रहा है। बीएड की छात्रा वैष्णवी जायसवाल ने कहा कि राजनीतिक दल के सदस्य व पदाधिकारी लैपटाप, स्मार्टफोन, स्कूटी के बजाय रोजगार देने की बात करें तो काफी बेहतर होगा। बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है।
बीएड की छात्रा नेहा वर्मा ने कहा कि राजनीतिक दल रोजगार दें तो स्कूटी व लैपटॉप तथा स्मार्टफोन को खुद खरीद लिया जाएगा। राजनीतिक दलों को समझना चाहिए कि उचित शिक्षा के अनुसार रोजगार की जरूरत है। बीएड की छात्रा निर्मला ने कहा कि हमें रोजगार की जरूरत है ताकि अपनी प्रतिभा से हम खुद अपनी जिम्मेदारी उठा सकें। चुनावी बैसाखी से युवाओं के स्वाभिमान पर प्रश्नचिह्न है जिसे राजनीतिक दलों के लोग खरीदने का प्रयास करते हैं।
बीएड छात्रा रंजना ने कहा चुनाव के दौरान लालच वाले वादे नहीं होनी चाहिए बल्कि विकास व रोजगार की बात हो तो क्षेत्र के युवाओं का भला हो सकेगा। युवा बेरोजगारी की मार खा रहा है, सिर्फ राजनीतिक दल उनका इस्तेमाल करते हैं।