महराजगंज। जहां पर नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं और जहां पर नारियों का तिरस्कार होता है वहां पर दरिद्रता निवास करती है। भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव ही सम्मान की दृष्टिकोण से देखा जाता है। वेद उपनिषद तथा अन्य ग्रन्थों में नारियों की वृहद रूप से चर्चा की गई है।
उक्त बातें युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की स्मृति में सशक्त नारी सशक्त भारत विषय पर आयोजित व्याख्यान में जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज की प्राचीन इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ. ज्योत्सना पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही नारी समाज को दिशा और दशा देने का कार्य की है। आज भी वह देश को मजबूत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
डॉ. रामपाल यादव ने कहा कि देश के विकास में नारी का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए समृद्धशाली नारी से समृद्ध देश बनेगा। डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के साथ ही अनेक शास्त्रों में नारी के गौरवशाली परंपरा की चर्चा की गई है। प्रधानाचार्या सपना सिंह ने कहा कि समृद्ध नारी तभी हो सकती है जब तक उनमें चारित्रिक विकास हो। क्योंकि चरित्र निर्माण किसी भी नारी के लिए बहुत बड़ा स्तंभ है। कार्यक्रम का संचालन अंजलि त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर विपिन कुमार, संदीप यादव, आनंद कुमार शुक्ल, कावेरी जायसवाल, प्रतिभा पांडे, अंजलि त्रिपाठी, रतन प्रिया मिश्रा, सरिता मिश्रा, शीला मिश्रा मौजूद रहे।