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Maharajganj News: नशीली दवाओं की तस्करी, नेटवर्क का हिस्सा बने बेरोजगार युवा

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महराजगंज। भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में नशीली दवाओं के तस्कर फिर सक्रिय हो गए हैं। बताया जा रहा है कि तस्करों के लिए कैरियर के रूप में काम करने वाले बेरोजगार युवक चंद रुपयों के लिए अलग-अलग इलाकों से नशीली दवाएं नेपाल पहुंचाते हैं। नेपाल सीमा से लगे गांवों में गैर लाइसेंसी दुकानें तस्करी का गढ़ बन चुकी हैं।
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सूत्रों की मानें तो सीमावर्ती क्षेत्र से तस्करी के धंधे में जुटे युवा पहले पैसे-पैसे के लिए तरसते थे। मगर, अब वह अच्छी खासी प्रॉपर्टी के मालिक बन गए हैं और इनकी गिनती गांव में संभ्रांत और समाजसेवी के रूप में होती है। इनकी देखी देखा अन्य बेरोजगार युवा भी इस धंधे में हाथ आजमाने लगे हैं। बताया जा रहा है कि बेरोजगार युवक नशीली दवाओं के साथ नेपाल का एक चक्कर लगाकर दो से पांच सौ रुपये कमा लेते हैं। इस खुलासा बीते दिनों एक युवक को नशीली दवा लेकर नेपाल जाते वक्त पकड़े जाने से हुआ है। औषधि निरीक्षक डीपी मौर्य ने बताया कि समय-समय पर जांच की जाती है। यदि ऐसा हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।



तस्करों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि तस्करी के लिए कैरियर के रूप में काम करने वाले युवकों को एक बार माल पहुंचाने के बाद दूसरे बॉर्डर पर भेज दिया जाता है। कैरियर का काम करने वाले एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि काम देने वाला मालिक दवा को गोरखपुर से सोनौली के रास्ते भैरहवा तक पहुंचाने को देता है। कभी ठूठीबारी के रास्ते भैरहवां तो कभी सिद्धार्थगर जिले के खनुवा बॉर्डर के रास्ते भैरहवां नशीली दवा पहुंचाने का काम मिलता है।
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नौतनवा के युवक ने गोरखपुर से खरीदी थी दवा



कुछ दिन पहले भैरहवा में नशीली दवा के साथ तीन युवक पकड़े गए थे। इनमें दो नेपाली युवकों के साथ नौतनवा का एक युवक शामिल रहा। पुलिस की पूछताछ में पता चला नौतनवा के युवक ने गोरखपुर से दवा खरीदा था। उसे पगडंडियों से सरहद पार कर नेपाली युवकों के साथ आगे ले जा रहा था। नेपाल में बॉर्डर से जितनी दूर दवा पहुंचेगी उसका रेट भी उतना ही महंगा हो जाएगा। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपी कई वर्षों से प्रतिबंधित धंधे में लिप्त थे।

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शराब के शौकीन बने नशीली टैबलेट के लती



नेपाल में शराब महंगी होने के कारण अधिकतर नेपाली युवा नशीली टैबलेट के लती होते जा रहे हैं। भैरहवा के डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि शराब पीने के बाद नींद आनी स्वभाविक है और दुर्गंध से पता चल जाता है कि बच्चे ने शराब पी रखी है। इससे बचने के लिए नशीली दवाओं का सेवन करते हैं।



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नेपाल में दस गुना दामों पर होती है आपूर्ति



सूत्र बताते हैं कि नेपाल में नशीली दवाएं महंगे दामों पर बिकती हैं। इन दवाओं का भारत के मुकाबले दस गुना अधिक मूल्य मिलता है। सीमावर्ती क्षेत्र में गैर लाइसेंसी दुकानों से नशीली दवाओं को नेपाल पहुंचाने में तस्करों का पूरा नेटवर्क जुड़ा है। तस्करों का पूरा सिंडिकेट इस धंधे को चकमाने के लिए अपना कोड वर्ड भी बनाया है। इससे उनको पता चलता है कि किस क्षेत्र में निगरानी तेज है।
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