महराजगंज। जिले की दो ग्राम पंचायतें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का रोल माॅडल बनेंगी। यह जिले की 880 ग्राम पंचायतों के लिए नजीर बनेंगी कि स्वच्छता के साथ आय सृजन भी किया जा सकता है।
इसके लिए सिसवां ब्लाॅक में जहां विभाग ने भूमि चिह्नित कर लिया है वहीं एक अन्य ब्लॉक में चिह्नांकन प्रक्रिया तेज है। इन ग्राम पंचायतों में एफएसटीपी यूनिट स्थापित होगी जो जैविक खाद बनाकर ग्राम पंचायत को आय सृजन का मौका उपलब्ध कराएगी। प्रति युनिट दो करोड़ रुपये की धनराशि की उपलब्धता का इसमें प्रावधान किया गया है जो केंद्र सरकार की तरफ से दिया जाएगा।
जनपद की दो ग्राम पंचायत में एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) युनिट की स्थापना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की तरफ से किया जाएगा। शासन की तरफ से 14 अगस्त तक जनपद की दो ग्राम पंचायतों में एक-एक एकड़ की भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है।
प्राप्त निर्देश के क्रम में विभाग ने सिसवां विकासखंड के रानीपुर ग्राम पंचायत में एक एकड़ का प्लाट आबादी से दूर जहां चिह्नित किया है वहीं एक अन्य ब्लाॅक में तलाशी जा रही है। एफएसटीपी की आवश्यकता व लाभ : एफएसटीपी की जरूरत इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि सभी ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के बाद हर ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत व सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं।
इन सभी शौचालय के सेफ्टी टैंक ऐसे हैं जो तीन वर्ष के भीतर एक बार साफ कराने की जरूरत होती है क्योंकि सेफ्टी टैंक की क्षमता अधिक नहीं होती। ऐसे में सेफ्टी टैंक भरने के बाद या तो उस शौचालय का उपयोग बंद कर देना पड़ रहा था अथवा शहरों से सेफ्टी टैंक सफाई के लिए मशीनें मंगानी पड़ रही थीं।
अब इस समस्या का समाधान हो जाएगा। एफएसटीपी युनिट एक ऐसी यूनिट होगी, जिसमें शौचालय सेफ्टी टैंक की सफाई के अवशेष गिराए जाएंगे। यह यूनिट इस अवशेष से पानी को ट्रीटमेंट कर सिंचाई के लिए उपलब्ध कराएगी वहीं ठोस अवशेष को जैविक उर्वरक में परिवर्तित कर देगी।