महराजगंज। पवित्र रमजान में रोजे का दौर चल रहा है। रोजेदार इफ्तार और सहरी का इंतजाम हर रोज कर रहे हैं। बाजार में फल, खजूर के बाद तीसरा सर्वाधिक बिक्री वाला आइटम सेंवई का है। जिले में सक्सेना चौक के सामने रोडवेज बस अड्डे तक सेंवई की दुकानें सजी हैं। यहां सजी तरह-तरह की सेंवई रोजेदारों का ध्यान खींच रहीं।
जिले में सेंवई कारोबार रमजान में तेज है। कारोबारियों के मुताबिक हर रोजेदार की सहरी में सेवई जरूर रहती जिसके कारण प्रति दिन 40 से 50 किलो सेंवई बिक रही। नेपाल के मधेसी जिलों तक जिले से लच्छेदार, रोस्टेड व बनारसी सेंवई की खेप डिमांड भेजी जाती। यहां इसकी मांग में इजाफा हो रहा है।
सक्सेना चौक के निकट सेंवई की दुकान संचालित करने वाले अल्तमस ने बताया कि उनकी दुकान 10 साल से यहीं लगती। पहले कारोबार अब्बा (पिता) करते थे उनके इंतकाल के बाद बड़ा भाई करता है। रमजान और ईद की पहचान मानी जाने वाली सेवई अलग- अलग स्वाद में हैं जो स्थान विशेष की पहचान भी बन गई हैं।
लच्छेदार, बारीक व बनारसी सेवइयां वाराणसी से आ रही। इनका रेट 120 रुपये से 200 रुपये किलो तक है। इसी रोड पर दुकान लगाने वाले अनवर ने बताया कि इस बार किमामी सेवई के साथ-साथ दूध वाली फेनी की भी मांग बढ़ रही है। लखनवी रोस्टेड सेंवई व सूखी सेंवई भी खूब पसंद आ रही।
बनारस से लेकर कानपुर तक की सेवइयां बाजार में पहुंच रही। डिमांड के मुताबिक बाहर से सेंवई की खेप मंगाकर नेपाल तक सप्लाई की जाती है। रमजान में इसकी मांग बहुत बढ़ गई है।