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Maharajganj News: ट्राम-वे इंजन को संरक्षित करने की बजाय प्रदर्शित करने का कुचक्र

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प्रेस विज्ञप्ति जारी कर महराजगंज जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय सिंह एडवोकेट ने लगाया आरोप
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महराजगंज। महाराजगंज की ऐतिहासिक पहचान और देश की पहली ट्रॉम-वे रेल का इंजन सोहगीबरवा सेंचुरी के लक्ष्मीपुर रेंज डिपो से उठाकर लखनऊ भेज दिया गया है। इसका एक इंजन पहले ही लखनऊ के चिड़ियाघर में भेजा जा चुका है। जिस इंजन को अपनी ही मिट्टी पर बनी पटरियों पर दौड़कर पर्यटकों का स्वागत करना चाहिए था उसे आज अपनी जड़ों से दूर कर दिया गया है। यह बातें मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर महराजगंज जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय सिंह एडवोकेट ने कहीं।
उन्होंने कहा कि ट्राम-वे इंजन को संरक्षित करने की बजाय प्रदर्शित करने का कुचक्र किया जा रहा है। यह सिर्फ एक पुराना इंजन नहीं था। यूनेस्को की विश्व धरोहर बनने का सामर्थ्य रखता था। वन विभाग की पहल पर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) के विशेषज्ञों ने दौरा कर इसके पुनरुद्धार की उम्मीद जगाई थी। डीएचआर के इंजीनियरों की तकनीकी प्रशिक्षण में 44 वर्ष से बंद पड़े इंजन को फिर से चलने के लिए इसके बॉयलर की मरम्मत की जरूरत बताया गया था।कहा था कि इंजन केरल भेज कर मरम्मत कराकर हिमालयन ट्रेन की तरह इसे फिर से चलाया जा सकता है।
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ट्राम वे के लिए नई लाइन बिछाने पर एक करोड़ प्रति किलोमीटर की दर से 16 करोड़ रुपये के खर्च अनुमान लगाया गया था। स्टेशन और अन्य मद में 40 से 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। अगर शासन की मंजूरी मिलती और यह ट्राॅम वे रेल फिर से चलती तो जनपद वैश्विक टूरिज्म के नक्शे पर चमकता। भगवान बुद्ध का ननिहाल देव दह व रामग्राम जैसे बौद्ध स्थलों के साथ मिलकर यह जिले में एक टूरिज्म सर्किट बना था। स्थानीय रोजगार व अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती अफसोस वाली बात यह है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को अपनी आंखों के सामने जाते देखकर भी जिला चुप रहा कुछ गिनती की आवाजों को छोड़कर कहीं से भी इस विस्थापन का विरोध नहीं हुआ। रेलवे लक्ष्मीपुर की ऐतिहासिक ट्राम-वे रेल परियोजना को लक्ष्मीपुर में ही संरक्षित करें। ब्यूरो
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