महराजगंज। बदल रहे महराजगंज में विकास परियोजनाओं से तस्वीर बदलने के साथ ही सुविधाएं भी बढ़ रही हैं। एक ओर मेडिकल शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ, वहीं दूसरी ओर चौड़ी सड़कों पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं।
आने वाले दिनों में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के साथ अन्य परियोजनाओं से काफी सहूलियत मिलेगी। अरबों की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसे पूरा होने के बाद सहूलियत बढ़ जाएगी।
महराजगंज शहर से गोरखपुर और महराजगंज से फरेंदा रूट पर सफर आसान हो गया है। गुजरे वक्त में बदहाल सड़कों पर सफर मुश्किल था। वक्त के साथ सड़कें बननी शुरू हुईं तो मुश्किल दूर हो गई। आज गोरखपुर जाने में एक घंटे से थोड़ा अधिक वक्त लगता है। यही हाल फरेंदा रूट पर है। चौड़ी सड़कों पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं।
सिंदुरिया से बागापार की सड़क भी चौड़ी हो चुकी है। करीब पांच साल पहले इस सड़क से कोई गुजरना नहीं चाहता था। अब सफर आसान हो गया है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में इलाज के साथ ही पढ़ाई शुरू हो गई है। गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा मेडिकल काॅलेज में है। दूर दराज से आने वाले छात्र यहां अध्ययन कर रहे हैं।
पर्यटन को संबृद्ध बनाने में कारगर पहल की जा रही है। अच्छे होटलों की भरमार है। बाहर से आने वाले लोग यहां ठहरना पसंद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में दो अत्याधुनिक होटल बनकर तैयार हो जाएंगे। वहीं नगर पालिका क्षेत्र में आकर्षक पार्क में लोगों को सुबह-शाम टहलने के लिए मिल रहा है। कुल मिलाकर विकास की परियोजनाएं पूरी हुईं तो जिले की तस्वीर में बदलाव नजर आने लगा है।
शास्त्री नगर के राकेश कहते हैं कि 10 साल पहले की तस्वीर और वर्तमान में जमीन आसमान का अंतर दिख रहा है। पहले गोरखपुर से महराजगंज का सफर तय करने में कमर में दर्द होने लगता था। अब तो करीब एक से डेढ़ घंटे में सफर पूरा हो जाता है। जय प्रकाश नगर के राधेश्याम ने बताया कि शहर में करोडों की लागत से आधुनिक बस स्टेशन बना है।
यहां बड़े शहरों की तरह बसों के लिए अगल-अलग प्लेटफार्म बने हैं। मूलभूत सभी सुविधाएं हैं। उधर, सीएमओ ऑफिस अपने भवन में संचालित होने से शहर की सीएचसी भी पूरी क्षमता से संचालित हो रही है। शहर के लोगों को नजदीक में स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
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महत्वपूर्ण पूरी हुई परियोजनाएं एक नजर में
-एक अरब की लागत से बना बैकुुंठपुर बिजली उपकेंद्र
-दो अरब की लागत वाली 250 किलोमीटर से अधिक तैयार सड़क
-19 करोड़ की लागत वाली सिंचाई विभाग की पांच परियोजना
-25 करोड़ की लागत वाली 11 पेयजल परियोजना
-चार करोड़ की लागत वाली पर्यटन विकास से जुड़ी योजना
-लगभग तीन करोड़ की लागत वाली मनरेगा पार्क व खेल मैदान
-दो करोड़ की लागत से निकायों में हुए पाइप लाइन विकास के कार्य
-80 लाख की लागत वाला जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालय
-एक करोड़ 19 लाख से जिला अस्पताल में बने मेडिकल, सर्जिकल एवं एक्सीडेंटल इमरजेंसी यूनिट
-40 लाख की लागत वाले अड्डा बाजार के पशु चिकित्सालय
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बैराज से सिंचाई की सुविधा हुई आसान
नौतनवा तहसील क्षेत्र के मिश्रवलिया गांव के निकट से होकर गुजरी रोहिनी नदी पर करीब 86.96 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटिक बैराज संचालित है। इससे किसानों को फायदा मिल रहा है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता बृजेश सोनी ने बताया कि इस बैराज के निर्माण से 65 गांवों की 8811 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की सुविधा हो गई है। रोहिनी बैराज की लंबाई 8 बाई 40 मीटर है। इसमें सात फाटक बने हैं। इसमें से निकलने वाली छह नहरों में मुख्य नहर रोहिन नहर, दुर्गापुर माइनर, रामनगर रजवाहा, अजगरहा माइनर, सिसवा माइनर, बेलवा माइनर शामिल है। इन सभी नहरों की 45.363 किलोमीटर लंबी है।
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ब्लड सेपरेशन यूनिट संचालित तो क्रिटिकल केयर यूनिट तैयार
ब्लड बैंक परिसर में ब्लड सेपरेशन यूनिट संचालित हो रही है। इससे रक्त को चार भागों में बांटने में सुविधा हो गई है। इससे मरीजों की मुश्किल दूर हो गई है। दूसरी ओर क्रिटिकल केयर यूनिट की बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। इसे भी जल्द संचालित किया जाएगा। आने वाले दिनों में इसका लाभ लोगों को मिलेगा।
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देवदह को पहचान तो रामग्राम को अस्तित्व में लाने का प्रयास
महराजगंज। महात्मा भगवान बुद्ध के ननिहाल देवदह को पहचान दिलाने का प्रयास जारी है। देवदह को विकसित कर पर्यटन से जोड़ने का प्रयास हो रहा है। इतिहासकारों के मुताबिक महराजगंज में ही भगवान बुद्ध की ननिहाल देवदह है। नौतनवा तहसील के बनरसिया कला और बनरसिया खुर्द में यह स्थान है। 1978 में पुरातत्व विभाग ने यहां 88.8 एकड़ भूमि संरक्षित कर किसी भी प्रकार के निर्माण और खनन पर रोक लगा दी। टीले के नाम मात्र 1.04 एकड़ जमीन बची है। देवदह गौतम बुद्ध की मां महामाया, मौसी महाप्रजापति गौतमी और पत्नी यशोधरा की जन्मस्थली है।
उधर, रामग्राम स्तूप को मान्यता दिलाने और महराजगंज को बौद्ध सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की जिला प्रशासन की पहल हुई है। रामग्राम स्तूप धातु चैत्य भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बना है। बताया जाता है कि जब गौतम बुद्ध का कुशीनगर में परिनिर्वाण हुआ तो विभिन्न राज्यों के राजा उनकी अस्थि लेने के लिए पहुंचे थे। वहां विवाद की स्थिति न पैदा होने पाए इसके लिए एक राय बनी कि बुद्ध की अस्थियों को आठ भागों में बांट दिया जाए। अस्थि का एक हिस्सा तत्कालीन कोलीय वंश के राजा महाकाल भी लेकर आए और अस्थियों पर स्तूप बनवा दिया। बाद में कुषाण व गुप्त कालखंड में इसे विस्तृत रूप दिया गया। कहा तो यहां तक जाता है कि सम्राट अशोक भी इस स्तूप का दर्शन करने आए थे। संवाद
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जिले में विकास कार्यो को गति मिलने से मुश्किल दूर हो रही है। गुजरे वक्त की बात करें तो समस्याओं से हर कोई जूझ रहा था, लेकिन आज तो बेहतर सड़कें, अस्पताल के साथ अन्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
-दुर्गेश सिंह, सिविल लाइन
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सचमुच में महराजगंज बदल रहा है। केंद्रीय विद्यालय संचालित होने के साथ ही मेडिकल की पढ़ाई भी हो रही है। अच्छे होटल होने से अब बाहर से आने वाले लोग यहीं ठहरना चाहते हैं। विकास की रफ्तार बढ़ी है।
-विजय पांडेय, सामाजिक कार्यकर्ता
प्रशासन की ओर से विकास को गति देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया गया है। जिले में तमाम महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुई हैं। इसका लाभ जनपदवासियों को मिल रहा है।
-संतोष कुमार शर्मा, जिलाधिकारी