फरेंदा। क्षेत्र के भारीवैसी नर्सरी में बना जटायु संरक्षण केंद्र जो बजट के अभाव में अधूरा पड़ा था, वह अब पूरी तरह बन कर पूर्ण हो गया है। संरक्षण केंद्र पर कुल गिद्धों की संख्या अब छह हो गई है। प्रजनन कार्य कराया भी जा रहा है। दो वर्षों के बाद गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जल्दी ही संरक्षण केंद्र का उद्धाटन किया जाएगा।
फरेंदा क्षेत्र के भारीवैसी नर्सरी में बांबे नेचर हिस्ट्री सोसाइटी व वन्य जीव अनुसंधान संगठन से मिलकर बनने वाला यह केंद्र तीन वर्ष में पूरा कर लिया गया। जटायु संरक्षण केंद्र अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण है। इसमें चारों तरफ सीसीटीवी कैमरा, परिसर में गार्ड रूम, प्रशासकीय भवन, नर्सरी ब्रीडिंग एवियरी, फूड सेक्सन व वेटेनरी सेक्सन का निर्माण कराया गया है। केंद्र पर चारों तरफ से बाउड्री, गिद्धों के सेहत की जांच के लिए अस्पताल आदि का निर्माण किया गया है। प्रदेश का पहला जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र होगा। प्रजनन केंद्र का उदेश्य गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी का है जिससे पर्यावरण को मदद मिलेगी।
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि जटायु संरक्षण केंद्र पर कुल गिद्धों की संख्या अब छह हो गई है। इसमें चार मादा व दो नर गिद्ध लाए गए हैं। केंद्र पर अधूरा पड़ा पिंजड़ा, ब्रिडिंग एवियरी, फूड सेक्सन व वेटेनरी सेक्सन को भी पूरा कर लिया गया है। अब कोई भी काम अधूरा नहीं है। उद्धघाटन मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ करेंगे।