महराजगंज। बृहस्पतिवार को मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होती रही। आंधी के चलते खेतों में ही गेहूं की फसल गिर गई है।
बारिश के चलते गेहूं की फसल कटाई प्रभावित हो गई। किसानों को चिंता सता रही है कि कहीं ओले पड़ गए तो फसल बर्बाद हो जाएगी। जिले में 2.48 लाख हेक्टेयर गेहूं की खेती हुई है। जबकि 40 प्रतिशत फसल कट गई है।
इधर, मौसम में बदलाव से किसान परेशान हो गए हैं। मुजहना गांव के किसान महेंद्र यादव ने बताया कि एक एकड़ गेहूं की फसल है। कटाई नहीं होने से चिंता बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि कटाई कराने के लिए मजदूरों का कई दिन से चक्कर लगा रहा हूं। मौसम साफ नहीं हुआ तो फसल बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जब जरूरत थी तो बारिश नहीं हुई। यह बारिश किसानों के लिए तो आफत है।
जिले में मिठौरा, सिसवा, घुघली, परतावल, भिटौली, पनियरा, बृजमनगंज समेत अन्य स्थानों पर फसल की कटाई नहीं होने से किसान परेशान हैं। सुबह से ही तेज हवा के साथ ही हल्की बारिश हुई। खेतों में कटाई के बाद पड़े गेहूं भीग गए हैं। अब फसल सूखने के बाद ही उनकी मड़ाई हो सकेगी।
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि आठ बीघा में अगेती गेहूं की बोआई की थी। इसमें 25,000 रुपये खर्च आया था। पूरी फसल गिरने से पैदावार पर असर पड़ेगा। अब लगता है कि लागत भी नहीं निकल पाएगी। किसान नरेश दुबे ने कहा कि ढाई बीघा गेहूं बोया था, तेज हवा से गिर गया है। किसान दिनेश कुमार ने बताया कि गेहूं की अगेती डेढ़ बीघा फसल तेज हवा और बारिश से खेत में गिर गई है।
कम हो जाएगी गेहूं की चमक बसुली कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनोद बहादुर सिंह ने बताया कि समय से पहले बारिश हो गई है। क्योंकि अभी लगभग 40 फीसदी गेहूं की फसल की कटाई हुई है। जबकि अधिकांश फसल पककर खेतों में है। बारिश से गेहूं की बालियों में पानी घुसने से उसकी चमक कम होने के साथ ही वह काली हो जाएगी।
इतना ही नहीं जो फसल काटकर खेतों में रखा गया है या फिर बोझा बांधा गया है उसका दाना फूलकर हल्का हो जाएगा। इन्होंने आगे बताया कि यह बारिश करीब 10 दिनों बाद हुई होती तो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती। क्योंकि बारिश के बाद किसान खेतों की जोताई करने के साथ ही हरी खाद के लिए उड़द, ढैंचा की बुआई कर लेते हैं।