महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करों ने एक नया खेल शुरू कर दिया है। नेपाल के बच्चों को भारत में बौद्ध मठों में पढ़ाई के नाम पर लेकर आते हैं। इनसे यहां भिक्षाटन समेत अन्य अनैतिक गतिविधियां कराते हैं।
नेपाल पुलिस की सतर्कता से इस पर अंकुश लगाया जा रहा है। बीते दिनों सीमा पर बच्चों को रोके जाने के बाद इसका खुलासा हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्र के थानों की पुलिस भी सतर्क रहती है। बच्चों एवं किशोरियों को बचा कर नेपाल के शेल्टर होम में काउंसिलिंग करने के बाद परिजनों को सौंप दिया जाता है।
मानव तस्करी की रोकथाम के लिए सरहद के दोनों तरफ समाजसेवी संस्था एसएसबी और नेपाल पुलिस कार्य करती है। इसके लिए हर सप्ताह जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। शुक्रवार की रात सीमा पर स्यानजा की रहने वाली तीन किशोरियों को नेपाल माइती संस्था ने सोनौली बॉर्डर से भारत आने के दौरान रोक लिया।
पूछताछ में पता चला कि सभी को दिल्ली लेकर जाने वाला युवक सोनौली बस डिपो पर इनका इंतजार कर रहा है। संस्था के कार्यकर्ताओं ने नेपाल पुलिस के सहयोग से इन्हें शेल्टर होम भेज दिया।
नेपाल माइती सेवा संस्थान की अध्यक्ष माया खत्री ने बताया कि तीन किशोरियों को रोककर पूछताछ की गई तो पता चला की यह किसी के साथ दिल्ली जा रहीं हैं। जब उक्त युवक को बुलाया गया तो वह फरार हो गया। तीनों किशोरियों को उनके परिजनों को बुलाकर सौंप दिया गया।
अशिक्षा है इस समस्या की जड़
नेपाल और भारत दोनों देशों में मानव तस्करी को लेकर पहले से अधिक सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नेपाल के ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा इस समस्या की जड़ है। मानव सेवा संस्थान सोनौली के इंचार्ज महबूब आलम ने बताया कि मानव तस्करी पर रोकथाम के लिए सीमा पर चौकसी बरती जाती है। नेपाल के गांवों में जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है। भारत सरकार भी मदद कर रही है। सीमा पर नेपाल से आने वाले बच्चों और महिलाओं से पूछताछ में संदेह होने पर पुलिस और उनके परिजनों को सूचित किया जाता है। पीआरसी संस्था के नितेश चौधरी ने बताया कि नेपाल के ग्रामीण इलाकों में अभी भी शिक्षा का अभाव है। कई ऐसे इलाके हैं, जहां अभी तक बिजली भी नहीं है। तस्कर ऐसे इलाकों को चिह्नित करते हैं। उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर भारत के रास्ते खाड़ी देशों में भेज देते हैं।
खाड़ी देशों में नेपाली महिलाओं के उत्पीड़न के बाद लगा रोक
सूत्रों की माने तो खाड़ी के कई देशों में बीते वर्षों में नेपाली लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आने के बाद नेपाल सरकार ने काम-धंधे के लिए विदेश जाने वाली लड़कियों पर उम्र संबंधी कुछ प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके बाद दलाल भारत के रास्ते खाड़ी देशों में नेपाली महिलाओं की तस्करी शुरू कर दी। दुर्व्यवहार के कई मामले सामने आने के बाद नेपाल सरकार की जांच में यह बात सामने आई कि उक्त महिलाएं भारत के रास्ते खाड़ी देशों में पहुंची हैं। इन घटनाओं के बाद नेपाल सरकार ने नेपाली नागरिकों के भारतीय एयर सेवा के लिए नेपाली दूतावास दिल्ली स्थित एनओसी अनिवार्य कर दिया।
सब कुछ जानते हुए रिस्क लेने को विवश महिलाएं
एक संस्था के कार्यकर्ताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ महिलाओं को पता होता है कि उन्हें बेचा जा रहा है, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी के कारण वह रिस्क लेकर दलालों के साथ घर से चल देती हैं। भारत में जाने के लिए नेपाली नागरिकों को आईडी के अलावा अन्य कागजात की जरूरत नहीं पड़ती है। नेपाली नागरिकों को भारत नेपाल मैत्री संधि का भी फायदा मिल जाता है।
संयुक्त पेट्रोलिंग कर बाल तस्करी बालश्रम रोकने पर जोर
सोनौली/नाैतनवा। शनिवार की दोपहर नौतनवा रेलवे स्टेशन पर पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति की ओर से लोगों को जागरूक किया गया। रेलवे पुलिस टीम एवं सब इंस्पेक्टर अजीत कुमार ने संयुक्त रूप से ट्रेनों के अंदर पूछताछ की। सब इंस्पेक्टर ने कहा कि अगर बालश्रम और बाल तस्करी की सूचना मिलती है, तो संबंधित हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। सशस्त्र सीमा बल के इंस्पेक्टर अजीत कुमार ने कहा कि बार्डर क्षेत्र में बच्चों के साथ किसी भी तरह का कोई अपराध करता है, तो इसकी जानकारी पुलिस और सशस्त्र सीमा बल को दें। नौतनवा रेलवे चौकी प्रभारी छविनाथ यादव, स्वामीनाथ, सुनील कुमार, पुष्पा चौधरी, शालिनी मौजूद रहे। संवाद