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Maharajganj News: दूसरे दिन भी नहीं लौटी मादा तेंदुआ, शावकों की निगरानी कर रहा विभाग

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पिपरिया गांव के सिवान में गन्ने की खेत में तेंदुआ व उसके मिलें दो शावक। 
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शावकों और उसकी मां के निगरानी के लिए मौके पर लगाए गए दो सीसीटीवी कैमरे
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मादा तेंदुआ दूसरे दिन भी शावकों की सुध लेने नहीं पहुंची, दहशत में लोग
ठूठीबारी/निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत मधवलिया वन रेंज के गांव पिपरिया स्थित सिवान के एक गन्ने की खेत में दो शावकों को छोड़कर गई मादा तेंदुआ दूसरे दिन उनकी सुध लेने नहीं पहुंची। शुक्रवार को वन विभाग की टीम दोनों शावकों की सुरक्षा में जुटी रही। वन विभाग की टीम ने शावकों और उनकी मां की निगरानी करने के लिए दो सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं।
वन विभाग की टीम को उम्मीद है कि मादा तेंदुआ दोनों शावकों को लेने आएगी। तेंदुए की मौजूदगी से आसपास के ग्रामीण बस्तियों के लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। ग्रामीण, सुरेश, पप्पू, राजू आदि ने बताया कि आबादी के करीब तेदुएं के आने से खेती का कार्य ठप हो चुका है। दोनों शावक भी दूसरे दिन खेत में पड़े रहे। लोगों को आशंका है कि शावकों की मां गन्ने की खेत में या आसपास ही कहीं छिपी है। स्थानीय लोगों ने रात में तेदुएं की दहाड़ भी सुनी है। वन विभाग की ओर से शावकों की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है।
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वन विभाग की टीम में शामिल डिप्टी रेंजर अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि शावकों की निगरानी करने के साथ ही आसपास के खेतों में तेदुएं का पता लगाने के लिए सर्चिंग भी की जा रही है। टीम की ओर से इस बात की भी तस्दीक की जा रही है कि शावकों की मां स्वस्थ और सुरक्षित रहे। मधवलिया वन क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि शावकों की सुरक्षा में टीम को तैनात कर दिया गया है। शावकों की उम्र करीब दो से तीन दिन की है। दूसरे दिन पूरी रात शावकों की मां के आने का इंतजार किया जाएगा। मौके पर रात में निगरानी करने के लिए दो सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए गए हैं। अगर शावकों की मां नहीं आई तो शनिवार को दोनों शावकों को रेस्क्यू कर चिड़ियाघर गोरखपुर भेज दिया जाएगा।
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किसानों की बढ़ी मुसीबत
पिपरिया गांव के सिवान में गन्ने की खेत में मिले दो शावक गन्ना किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। शमशाद अहमद, प्रदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, हरीशचंद्र प्रजापति, रघुवीर सिंह, श्यामा, रघ्घू मौर्य, सुदर्शन, इरशाद ग्यासुद्दीन ने बताया कि गडौरा चीनी मिल से गन्ना पर्ची मिला है। गन्ना काट छिलकर चीनी मिल में भेजना है। लेकिन भय के मारे कोई भी ग्रामीण गन्ने की कटाई करने नहीं जा रहा है। डर है की गन्ने में छिपा तेंदुआ कहीं हमला न कर दे।
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