महराजगंज। तराई क्षेत्र की धरती इस बार दालों से लहलहाएगीं, क्योंकि विभाग ऐसे किसानों को खुद से जोड़ रहा है जो दालों की खेती करने के लिए इच्छुक हों और उनके पास पर्याप्त कृषि भूमि हो। अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में 18 क्विंटल उड़द तो 500 क्विंटल के लगभग मूंग बीजों की किट आ चुकी है।
बीजों के किट अबतक घुघली, परतावल और पनियरा के कृषि बीज भंडारों तक पहुंचाया भी जा चुका है। बाजार में उड़द की बात करें तो दालों के साथ-साथ बड़े के लिए इसकी मांग पूरे वर्ष रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र बसूली के वैज्ञानिक डॉ. बी चंद्रन के मुताबिक उड़द की खेती दलहनी फसलों की श्रेणी में गिनी जाती हैं। यह 60 से 65 दिन में तैयार होने वाली फसल है। इसके अलावा इसके पोषक तत्वों के कारण बाजार में भी इसकी मांग बनी रहती है। इसकी खेती के लिए गर्मी का मौसम सही रहता है, क्योंकि इस समय तापमान में नमी कम होती है।
उड़द की खेती के लिए यह मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी बोआई अप्रैल के पहले पखवारे में पूर्ण करनी चाहिए। इस फसल के लिए 40 डिग्री या इससे अधिक तापमान बेहतर माना जाता है। जिले में आए उड़द से करीब 600 से अधिक किसानों को बीज वितरण की योजना है। इसी के साथ जायद में बोई जाने वाली मूंग की बोआई भी किसान कर सकते हैं। मूंग जैसी दलहनी फसल से यह फायदा होता है कि यह खेत में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ाती है, जिससे दूसरी फसलों से भी बढ़िया उत्पादन मिलता है। मूंग की फसल के लिए ज्यादा बारिश नुकसानदायक होती है, ऐसे क्षेत्र जहां पर 60-75 सेमी तक वार्षिक बारिश होती है, मूंग की खेती वहां के लिए उपयुक्त होती है। मूंग की फसल के लिए गर्म जलवायु की जरूरत पड़ती है। दोमट और मटियार मिट्टी इसके लिए बेहतर है। जिले के किसान गन्ने की फसल के साथ भी इसकी खेती कर सकते हैं जिससे गन्ने की फसल को भी लाभ मिलेगा।
जिले में उड़द की 18 क्विंटल मिनी किट व मूंग की 500 क्विंटल किट आई है। प्रत्येक किट चार किलो का है। एक किट से 50 डिस्मिल कृषि क्षेत्र की बुआई हो सकती है। विभाग के पंजीकृत और तय मात्रा में भूमि रखने वाले किसानों को बीज दिए जाएंगे। डिजिटल क्राप सर्वे कराकर रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।
-संजय कुमार पटेल, प्रभारी, राजकीय कृषि बीज भंडार, महराजगंज