महराजगंज। भारत नेपाल सीमा पर तस्करों ने ट्रेंड बदल दिया है। महिलाओं को ढाल बनाकर तस्कर अपना धंधा चमकाकर मालामाल हो रहे हैं। एक महिला को चार से पांच बार एक पगडंडी से भेजा जाता है। इसके बाद तस्कर उस महिला को बदल देते हैं। करोड़ों के खेल में तस्करों के सिंडिकेट का मोहरा महिलाएं बन रहीं हैं। सीमा क्षेत्र से आने जाने के दौरान किसी को शक भी नहीं होता है। महिलाएं झोले में नेपाल से सामान लेकर आराम से चली आती हैं।
तस्करी के पूरे खेल को समझने के लिए सीमावर्ती इलाकों का रूख करना पड़ा। पड़ताल के दौरान चौकाने वाले तथ्य सामने आए। तस्कर गांव में भ्रमण के दौरान जरूरतमंद महिलाओं पर नजर रखते हैं। उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी लेकर उधार के तौर पर उनको रकम देकर जरूरत पूरी कर देते हैं उसके बाद उनको काम सौंप देते हैं। झोले में जरूरत का सामान रखकर उनको निर्धारित स्थान पर पहुंचने को कह देते हैं। महिलाएं भी रकम चुकता करने के चक्कर में चल देती हैं। लहसुन से लेकर जरूरत की हर सामाग्री को सरहद पार करा दिया जाता है। इन दिनों खासकर लहसुन की तस्करी तेज हो गई है।
सीमावर्ती क्षेत्र के अलावा बाहर से भी महिलाओं को तस्करों ने इस धंधे में उतार दिया है। झुलनीपुर नहर के पास चार लोग आपस में बातचीत करते दिखे। एक व्यक्ति बोला की बार्डर पर सख्ती बढ़ गई है, लेकिन तस्करी कम होने का नाम नहीं ले रही है। दोनों तरफ जो सामान महंगा होता है, उसी की तस्करी शुरू हो जाती है।
84 किमी खुली सीमा पर पगडंडियों से कैरियर धंधा करने में जुटे हैं। दिन ढलते ही तीन चार की संख्या में पिकअप एक साथ निकलते हैं। उनकी गति इतनी तेज होती है की सावधानी हटी तो दुर्घटना तय है। हरदीडाली की ओर से महिलाओं की बातचीत में पता चला की जरूरत में रकम मिल जाती है। कभी-कभार सामने लेकर जाना पड़ता है। इ
डूंडा कॉलोनी के प्राथमिक विद्यालय के गेट पर लगा ताला।स्रोत:शिक्षक