भारत से वैध तरीके से नेपाल जूते भेजने पर लगता है 35 फीसदी तक टैक्स
सीमावर्ती इलाकों में कई धंधेबाज जूतों सहित अन्य उत्पादों की करते हैं तस्करी
महराजगंज/ठूठीबारी। नेपाल में भारत से जूते मंगाने पर अधिक लगने वाले टैक्स को बचाने के लिए धंधेबाजों ने तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। भारतीय क्षेत्र में सक्रिय तस्कर आगरा व दिल्ली जैसे शहरों से जूते मंगाकर नेपाल भिजवाकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। नेपाल में बैठे तस्कर इसे सस्ती दर पा जाते हैं और ऊंची दरों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं।
जानकारी के अनुसार, 19 जून को पुलिस ने लक्ष्मीपुर खुर्द क्षेत्र में 20 गत्तों में 679 चर्चित कंपनियों के जूते बरामद किए थे। यह जूते तस्करी के लिए रखे गए थे। इनकी कीमत करीब दो लाख रुपये बताई जा रही है। जूतों के साथ पकड़ा गया आरोपी पहले भी कई बॉर्डर पर तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि तस्कर दिल्ली और आगरा के बाजारों से चर्चित कंपनियों के जूते खरीदता था। नेपाल के बाजारों में इन जूतों की मांग बहुत ज्यादा है।
सूत्रों के अनुसार, तस्कर ब्रांडेड जूते बिना किसी वैध दस्तावेज और टैक्स चुकाए, अवैध रास्तों से नेपाल भेजते थे। बताया जा रहा है कि भारतीय विदेशी ब्रांड के नाम पर धंधेबाज महंगे दाम पर नेपाल के नवलपरासी, दांग, मुगलिंग, चोरमारा, काठमांडू, पोखरा, बुटवल, नरायनगढ, भुतहा, त्रिवेणी, बरघाट आदि बड़े-बड़े शहरों में भेजते हैं। वहीं पर भारतीय 300 से लेकर 500 के जूते तीन से चार गुना महंगे दाम पर बेचकर काली कमाई करते हैं।
प्रशासन द्वारा तस्करों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से तस्कर अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। बाॅर्डर पर तैनात एसएसबी लक्ष्मीपुर खुर्द पुलिस चौकी सुरक्षा भेदकर भारत नेपाल बाॅर्डर पार कर तस्करी की घटना को अंजाम दे रहे हैं।
इस संबंध में निचलौल कस्टम इंस्पेक्टर भगवान शाह ने बताया कि अगर तस्करी के सामानों के साथ एक ही व्यक्ति बार-बार पकड़ा जाता है तो उस व्यक्ति से नियमानुसार कस्टम चार्ज बढ़ा दिया जाता है ऐसे लोगों को चिह्नित कर विधिक कार्रवाई की जाती है। तस्करी रोकने के लिए लगातार चेकिंग की जाती है।
बरामदगी खोलती है तस्करी की पोल लक्ष्मीपुर
नेपाल बॉर्डर पर तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। बाॅर्डर से सटे ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मीपुर खुर्द तस्करों के लिए सेफ जोन बना हुआ है। नेपाल में डिमांड के हिसाब से तस्कर सुरक्षा एजेंसियों के पलक झपकते ही तस्करी की घटना अंजाम दे रहे हैं। वहीं प्रशासन द्वारा कभी कभार तस्करी का सामान बरामद होता है तो बॉर्डर पर हो रहे तस्करी का पोल खुल जाता है।
तस्करी कर 35 प्रतिशत तक बचाते हैं टैक्स
जूतों को भारत से नेपाल भेजने वाले तस्कर छोटी कंपनियों के उत्पाद पर 23 और बड़ी कंपनियों के उत्पादों पर 35 प्रतिशत तक टैक्स बचा लेते हैं। इसे आसानी से समझने के लिए मान लेते हैं कि भारत में कोई जूता 100 रुपये में खरीदा जाता है। यदि यह छोटी कंपनियों का होगा तो 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और बड़ी कंपनी का होगा तो 20 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी देनी पड़ेगी। इसके अलावा 13 और 15 फीसदी वैट देना पड़ता है। इस तरह छोटी कंपनियों के जूतों पर 23 और बड़ी कंपनियों के जूतों पर 35 फीसदी टैक्स देना पड़ता है। यानि भारत में 100 रुपये में खरीदा गए जूते की लागत नेपाल पहुंचने तक 135 रुपये हो जाती है। लेकिन तस्करी के जरिए महज मामूली खर्च करके जूते नेपाल पहुुंचा दिए जाते हैं। चूंकि तस्कर बड़े पैमाने पर ऐसा करते हैं इसलिए एक बार में वह हजारों रुपये की बचत कर लेते हैं।