भुगतान में शिथिलता पर गड़ौरा चीनी मिल को आरसी जारी
- मिल पर अभी भी बाकी है किसानों के 27 करोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। पेराई सत्र 2017-18 की तरह ही इस वर्ष भी बकाया गन्ना मूल्य का समय से भुगतान न करना जेएचवी सुगर मिल गड़ौरा पर भारी पड़ गया। गन्ना आयुक्त ने भुगतान में शिथिलता पर गड़ौरा मिल प्रबंधन को वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किया है।
जेएचवी सुगर मिल गड़ौरा द्वारा पेराई सत्र 2017-18 में किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया था जिसे लेकर न सिर्फ किसान सड़क पर उतरे थे बल्कि मामले के बढ़ने व शासन तक पहुंचने के बाद कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मिल को दो पेराई सत्र में बंद भी करना पड़ा। वित्तीय वर्ष 2020-21 के पेराई सत्र में मिल को इस शर्त के साथ प्रारंभ किया गया कि पहले पुराने बकाए को मिल द्वारा भुगतान किया जाएगा उसके बाद वर्तमान पेराई सत्र के बकाए को। पेराई सत्र बीतने के उपरांत भी अभी तक मिल द्वारा पेराई सत्र 2017-18 का ही 1.31 करोड़ का भुगतान नहीं किया जा सका है। वर्तमान पेराई सत्र में बकाया 26.16 करोड़ के गन्ना मूल्य का भुगतान तो अभी दूर की बात है। भुगतान को लेकर गन्ना विभाग व जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी जिम्मेदारों द्वारा शिथिलता बरते जाने पर गन्ना आयुक्त ने मिल के विरुद्ध आरसी जारी कर दिया है। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने में शिथिलता बरतने पर गड़ौरा चीनी मिल को गन्ना आयुक्त द्वारा आरसी जारी की गई है।
लगभग आठ हजार से अधिक किसानों की बढ़ी मुश्किल
गन्ना विभाग के जिम्मेदारों की माने तो गड़ौरा चीनी मिल द्वारा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान न होने से लगभग 8000 से अधिक किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। कृषि पर आधारित इस जिले का किसान यह सोचकर उपज तैयार करता है कि समय से भुगतान होने पर वह न सिर्फ अपने जरूरतों को पूरा कर लेगा बल्कि आगे भी अपनी खेती को लेकर सभी आवश्यक तैयारियों को कर सकेगा।