महराजगंज। मिठौरा क्षेत्र की ग्रामसभा मधुबनी में चल रहे रुद्र महायज्ञ के तीसरे दिन सीतामढ़ी बिहार के रामलीला मंडल के कलाकारों ने अहिल्या उद्धार और ताड़का वध का मंचन किया।
गुरु वशिष्ठ के आश्रम से शिक्षा ग्रहण करने के बाद श्रीराम अपने भाईयों के साथ वापस अयोध्या आते हैं। दूसरे दिन महाराज दशरथ कुल गुरु वशिष्ठ के सानिध्य में श्रीराम को अयोध्या का राजपाट देने की सलाह मंत्री सुमंत्र तथा पुरवासियों से विचार-विमर्श कर रहे थे। इसी बीच ब्रह्मर्षि विश्वामित्र के आने की सूचना द्वारपालों ने महाराज दशरथ को दी। विश्वामित्र ने कहा कि हे राजन असुर समूह सतावहिं मोहीं, मैं आयहु नृप जांचन तोहीं। अपने दोनों बालक मुझे यज्ञ की रक्षा के लिए भेजें। इसके बाद महाराज दशरथ गुरु महर्षि वशिष्ठ के आदेशानुसार दोनों पुत्रों को विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए भेज देते हैं। रास्ते में राम, लक्ष्मण एक शिला को देखते हैं। शिला के बारे में विश्वामित्र ने राम को बताया कि गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी को शाप देकर पत्थर बना दिया है। यह शिला वर्षो से यह शिला आपके चरण रज चाहती है। विश्वामित्र के इतना कहते ही राम ने पत्थर को अपने चरण से स्पर्श किया, अहिल्या प्रकट हो गईं। इसके बाद यह बताए जाने पर कि ताड़का नामक राक्षसी इसी वन में कही विश्राम करती है, श्रीराम के धनुष से टंकार करने पर ताड़का विश्वामित्र पर ज्योंही झपटी, श्रीराम-लक्ष्मण ने अपने वाणों से उसका वध कर डाला। संवाद