लापरवाही की हद...पेड़ बनने से पहले बेमौत मर गए पौधे
निचलौल (महराजगंज)। क्षेत्र के गांवों को हरा भरा करने के लिए हर वर्ष वृहद पौधरोपण अभियान के जरिए हरियाली लाने का प्रयास कागजों में ही सिमट कर रह गया है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते पौधे पेड़ बनने से पहले ही सूखते नजर आ रहे हैं, जबकि ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक कर्मचारी तक एक दूसरे पर आरोप लगाकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
शनिवार को पड़ताल की गई तो पता चला कि अधिकांश गांवों में लगे पौध सूखने लगे हैं। इतना ही कई गांवों में तो जिम्मेदारों की लापरवाही हद पार कर गई है, क्योंकि यहां पर पौधों को बगैर रोपे ही सुखाया जा रहा है। एपीओ शिवेन्द्र सूर्यवंशी ने बताया कि क्षेत्र के कुल 108 गांवों में तीन लाख 24 हजार पौधे लगाए। पौधरोपण में खर्च होने वाले मजदूरी का भुगतान मनरेगा से हुआ है। संवाद
----
बगैर रोपे ट्रॉली पर सूख रहा पौधा
बूढ़ाडिह कला गांव में पौधरोपण के नाम पर जिम्मेदारों ने मजाक किया है। उच्चधिकारियों द्वारा बैठक कर पौधों को रोपण कर सुरक्षित करने के लिए सख्त निर्देश का इन पर असर नहीं हुआ। यही कारण है कि ग्राम प्रधान के दरवाजे पर खड़ी ट्रॉली में लदे सैकड़ों पौधे सूख रहे हैं। ग्राम प्रधान मंजू के पति धनन्जय कसौधन ने कहा कि चार जुलाई को पौधरोपण के लिए 25 सौ पौधों का उठान किया था। जिसमें में 80 फीसदी ग्रामीणों में वितरण कर दिए गए हैं। शेष पौधों को लगाने के लिए ट्रॉली पर रखा गया है।
------------------
पौधरोपण कर भूल गए जिम्मेदार
कपिया गांव में भी पौधरोपण को लेकर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां पर जिम्मेदारों ने गांव के दक्षिण तरफ पोखरी के तटबंधों पर पौधों का रोपण कर दिया, फिर उसकी देखभाल करना भूल गए। जिसके चलते पौधे पेड़ बनने से पहले ही सूखते नजर आ रहे हैं। ग्राम प्रधान नरेंद्र देव ने कहा कि पौधरोपण के लिए चार जुलाई को तीन हजार पौधों का उठान किया गया था। सभी लगा दिए गए हैं।
------------------
सड़क किनारे फेंक दिया पौधा
बाली गांव में पौधरोपण अभियान का आलम यह है कि जिम्मेदारों ने कुछ पौधों को पोखरी के तटबंध पर लगाकर कागजों में अपना नाम दर्ज करा लिया। शेष बचे सैकड़ों पौधों को गांव में जाने वाली पक्की सड़क के किनारे फेंक दिया है। जिसके चलते पौधे सूख चुके हैं। इतना ही नहीं रखरखाव न होने से रोपे गए पौधे भी सूख गए हैं। ग्राम प्रधान पति गिरीश ने कहा कि चार जुलाई को पौध रोपण के लिए दो हजार पौधों का उठान किया था। जिसमें सागौन, अर्जुन, नीम सहित अन्य प्रजाति के पौधे शामिल थे। पौधों को गांव से पूरब पीपरहिया पोखरी पर लगा दिया गया है।
-----------------
बारिश के इंतजार में सूख गए पौधे
कटहरी खुर्द गांव में भी पौधरोपण का नजारा कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां पर जिम्मेदारों ने गांव के पश्चिम की तरफ पोखरी के तटबंध पर पौधरोपण की देखभाल करना छोड़ दिया, जिसके चलते पौधे सूख गए हैं। ग्राम प्रधान पति संतोष पासवान ने कहा कि तीन जुलाई को पौधरोपण करने के लिए 12 सौ पौधों का उठान किया गया था। पौधों को लगा भी दिया गया, लेकिन बारिश न होने के चलते पौधे सूख रहे हैं।
--------------
जांच कराकर होगी कार्रवाई
खंड विकास अधिकारी चंद्रशेखर कुशवाहा ने कहा कि पौधरोपण को लेकर प्रशासन सख्त है। पौधों को समय से लगाने के साथ ही बचाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है। ऐसे में अगर पौधों को लेकर किसी के द्वारा लापरवाही की गई है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
----------------
एक पौधे को तैयार करने में खर्च होते हैं पांच रुपये
वन विभाग के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक वन रेंज पौधशाला में तैयार होने वाले एक पौधे पर करीब पांच रुपये की लागत आती है। काफी मेहनत कर पौधों को तैयार किया जाता है। उसके बाद पौधरोपण के लिए वितरित किया जाता है।