अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे कराने के लिए जिला अस्पताल का सहारा
महराजगंज। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे फाइलों में सिमट कर रह गए हैं। सिर्फ कहने के लिए अवाम को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है। लेकिन, हकीकत में स्थिति बदहाल है। ब्लॉक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोगों को दवाएं भी बाहर से लेनी पड़ती हैं। यही नहीं, एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा में नहीं मिल रही है जिससे रकम खर्च कर जांच कराना पड़ता है। सस्ते इलाज के चक्कर में मरीजों को रकम खर्च कर इलाज कराना पड़ता है।
ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनियरा में मरीजों की बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है। यहां आने वाले मरीजों को अगर अल्ट्रासाउंड या एक्स- रे कराना पड़ता है तो उनकी रकम खर्च करनी पड़ती है। या फिर पनियरा से करीब 25 किमी दूरी पर जिला अस्पताल की शरण में आना पड़ता है। पीएचसी पर यह सुविधा नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है। अस्पताल में सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन, अगर आपरेशन की जरूरत पड़ती है तो जिला अस्पताल का ही सहारा रहता है। गंभीर हालत में 25 किमी की दूरी तय कर जिला अस्पताल तक पहुंचना जोखिम भरा होता है। पनियरा क्षेत्र के नगर पंचायत सहित 72 गांव की करीब 2 लाख 66 हजार 427 की आबादी को सेहतमंद बनाने की जिम्मेदारी इस पीएचसी पर है।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वीर विक्रम सिंह ने बताया कि दवाएं भरपूर हैं। कोई दवा बाहर की नहीं लिखी जाती है। एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। पर्याप्त स्टाफ की तैनाती है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर इलाज का प्रयास जारी है।
इन लोगों की पीएचसी में है तैनाती
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनियरा में वर्तमान में तीन डॉक्टर तैनात हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वीर विक्रम सिंह, डॉ. सतेन्द्र कुमार, डॉ. मोहम्मद अहसन अंसारी एवं रामभवन वार्ड ब्वाय, शमशेर खान वार्ड ब्वाय, दिवाकर चौधरी हेल्थ सुपरवाइजर, राजीव सक्सेना हेल्थ सुपरवाइजर, कौशल कुमार सिंह लैब टेक्नीशियन, संतोष सिंह लैब असिस्टेंट, डॉ. बकाउल्लाह अंसारी नेत्र परीक्षण अधिकारी, सुनील कुमार उपाध्याय फार्मासिस्ट, उमेश कुमार राव फार्मासिस्ट, रितेश कुमार हेड लिपिक, अजय बहादुर सिंह एनएमए, नियामतुल्लाह एनएमए, अवधेश सिंह एनएमए की तैनाती है।
अस्पताल में समय से नहीं मिलते डॉक्टर
जंगल बड़हरा गांव के रामनयन विश्वकर्मा ने बताया कि ओपीडी में डॉक्टर समय से नहीं मिलते हैं। बृहस्पतिवार को अस्पताल में इलाज कराने पहुंचा तो डॉक्टर नहीं मिले। सतगुर गांव के टिकोरी प्रसाद ने बताया कि पत्नी को पेट में काफी दर्द हो रहा है इलाज के अस्पताल पर पहुंचा, लेकिन डॉक्टर को नहीं मिलने के वजह से मेडिकल स्टोर से दवा लेकर घर गया। देवीशरण ने कहा कि अगर एमरजेंसी में किसी महिला का इलाज कराना हो तो प्राइवेट नर्सिंग होम में जाना पड़ता है। बुझारत प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक समय से नहीं मिलते हैं।
सीवीसी जांच की सुविधा नहीं
ब्लड की सुविधा में टाइफाइड, मलेरिया, एचआईवी, ब्लड ग्रुप एवं प्रसव से संबंधित सभी जांच की जाती है। यहां पर सीवीसी, लीवर संबंधी, हेपेटाइटिस आदि की जांच की सुविधा नहीं है।