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पाकिस्तान की जेल में 27 महीने की आपबीती: पाक सैनिकों ने दी दर्दनाक यातनाएं, एक-एक रोटी के लिए था तरसाया

Thu, 15 Jun 2023 02:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज।

सार

बृजमनगंज थाना क्षेत्र के ग्रामसभा बरगाहपुर निवासी उमेश रोजी रोटी की तलाश में गुजरात कमाने गया था। जहां पर समुद्र में मछली मारने के दौरान 19 मार्च 2021 को मोटर बोट का पट्टा टूट जाने के कारण मोटर बोट बहते हुए पाकिस्तानी सीमा में चला गया। जहां मोटर बोट पर सवार पांच व एक अन्य को पाकिस्तानी नेवी के जवानों ने सभी छह लोगों को पकड़ कर कराची ले गए।
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पाकिस्तान जेल से रिहा होने के बाद उमेश निषाद परिजनों के साथ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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पाकिस्तान की जेल से 27 माह के बाद उमेश रिहा हुए तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। परिवार की याद में समय गुजरने के दौरान उनको यकीन नहीं था कि कभी हम परिवार के बीच पहुंचेगें। पाकिस्तानी जेल में डर के साये में जीवन कट रहा था न खाने का भरोसा था न ही जीने का। परिवार की याद हमेशा सता रही थी। ऐसे में जब 9 जून को अमृतसर के बाघा बार्डर से भारत की सीमा में पहुंचा तो आंखों में जीवन जीने की चमक दिखी।

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कैसे पहुंचे पाकिस्तान
बृजमनगंज थाना क्षेत्र के ग्रामसभा बरगाहपुर निवासी उमेश रोजी रोटी की तलाश में गुजरात कमाने गया था। जहां पर समुद्र में मछली मारने के दौरान 19 मार्च 2021 को मोटर बोट का पट्टा टूट जाने के कारण मोटर बोट बहते हुए पाकिस्तानी सीमा में चला गया। जहां मोटर बोट पर सवार पांच व एक अन्य को पाकिस्तानी नेवी के जवानों ने सभी छह लोगों को पकड़ कर कराची ले गए। उमेश निषाद ने बताया कि सभी लोगों को पुलिस कस्टडी में ले जाकर उनसे कड़ाई से पूछताछ के बाद मलीर जेल में भेज दिया गया।

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नाश्ते में मिलती था चाय व एक रोटी

बताया कि जेल में सुबह नाश्ते में एक कप चाय व एक रोटी मिलती थी। दोपहर में दो रोटी व सब्जी मिलती थी। जिससे पेट पूरी तरह से नहीं भर पाता था। पाकिस्तान की जेल में भारतीयों के साथ खराब बर्ताव किया जाता है। खाने रहने में परेशानी होती थी। हर वक्त डर का साया मडराता रहता था। जीवन संकट में होने का महसूस होता था। परिवार से मिलने की आस टूट चुकी थी। उमेश ने बताया कि एक जून को जब कराची जेल से रिहा किया गया तो जीवन में नई उर्जा मिल गई।

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भारत सरकार के प्रयास की उमेश ने की सराहना
तीन जून को पाकिस्तानी सैनिकों ने 200 मछुआरों को बाघा बार्डर पर बीएसएफ को सुपुर्द किया। 9 जून को उमेश जब घर पहुंचा तो परिवार को देख कर आंखों से आंसू छलक पड़े। घर पहुंचते ही परिवार के लोग उसे गले लगा कर भारत सरकार के प्रयास की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री को बधाई दी। उमेश को देखने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ था। उनके रिश्तेदार मिलने पहुंच रहे हैं।

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