बताया कि जेल में सुबह नाश्ते में एक कप चाय व एक रोटी मिलती थी। दोपहर में दो रोटी व सब्जी मिलती थी। जिससे पेट पूरी तरह से नहीं भर पाता था। पाकिस्तान की जेल में भारतीयों के साथ खराब बर्ताव किया जाता है। खाने रहने में परेशानी होती थी। हर वक्त डर का साया मडराता रहता था। जीवन संकट में होने का महसूस होता था। परिवार से मिलने की आस टूट चुकी थी। उमेश ने बताया कि एक जून को जब कराची जेल से रिहा किया गया तो जीवन में नई उर्जा मिल गई।
इसे भी पढ़ें: नारायणी का बढ़ने लगा जलस्तर तो शुरू कराई बंधे की मरम्मत
भारत सरकार के प्रयास की उमेश ने की सराहना
तीन जून को पाकिस्तानी सैनिकों ने 200 मछुआरों को बाघा बार्डर पर बीएसएफ को सुपुर्द किया। 9 जून को उमेश जब घर पहुंचा तो परिवार को देख कर आंखों से आंसू छलक पड़े। घर पहुंचते ही परिवार के लोग उसे गले लगा कर भारत सरकार के प्रयास की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री को बधाई दी। उमेश को देखने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ था। उनके रिश्तेदार मिलने पहुंच रहे हैं।