महराजगंज। कुपोषण के खिलाफ चल रहे पोषण माह में जिले में गंभीर कुपोषित बच्चों को उपचार दिलाने की मुहिम रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जिला अस्पताल में संचालित 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में केवल दो बच्चे भर्ती हैं जबकि आठ बेड खाली चल रहा है। विभागीय स्तर पर गंभीर कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर एनआरसी में भर्ती कराने की जिम्मेदारी आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आरबीएसके टीमों को दी गई है। इसके बावजूद हर माह तय लक्ष्य के अनुरूप बच्चों की भर्ती नहीं हो पा रही है।
एनआरसी में भर्ती बच्चों को चिकित्सकीय उपचार के साथ पोषणयुक्त आहार देकर स्वस्थ करने का प्रयास किया जाता है। विभाग ने हर माह 20 कुपोषित बच्चों को भर्ती कराना होता है। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 15, मई में 12, जून में 19, जुलाई में 16 और अगस्त में 18 बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया। सितंबर में अब तक केवल छह बच्चों को भर्ती कराया जा सका है। इससे साफ है कि लगातार कई महीनों से निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में एनआरसी में आराध्या निवासी लालपुर, नौतनवां और दिशु निवासी चकदह, नौतनवां का उपचार चल रहा है। शेष आठ बेड खाली हैं। सितंबर में पोषण माह चलने के बावजूद एनआरसी में भर्ती बच्चों की संख्या कम होना विभाग की ओर से बच्चों की पहचान और उन्हें केंद्र तक पहुंचाने पर कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे है।
बाल विकास सेवा व पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 244 बच्चे गंभीर कुपोषित और लगभग 1,973 बच्चे कुपोषित हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों को समय से उपचार मिलना जरूरी है। गंभीर कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के बाद उन्हें एनआरसी तक पहुंचाया जाए जिससे पोषण माह को सफल बनाया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के सामंजस्य से अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। अगर कही समस्या हो रही है तो तत्काल इन विभागों से वार्ता कर अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाएगा।