महराजगंज। सीएम अखिलेश यादव की ओर से विधानसभा चुनाव के लिए 403 उम्मीदवारों की सूची मुलायम सिंह यादव को सौंपने और इस बीच सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के सपा के अगले मुख्यमंत्री का नाम जीतकर विधायकों की रजामंदी से तय होने के कथन से सपा में चुनाव से पहले चाचा-भतीजे की घमासान के आसार फिर बढ़ गए हैं।
इसके चलते उम्मीदवारी की दावेदारी में शामिल सपा नेताओं की नींद उड़ गई है, वहीं सबकी निगाहें अमन मणि त्रिपाठी और नौतनवा विधानसभा सीट की ओर हैं।
मधुमिता हत्याकांड में पूर्व मंत्री अमरमणि को पत्नी के साथ आजीवन कारावास की सजा में जेल भेजे जाने के बाद से नौतनवा सीट की सियासी विरासत के लिए जहां परिवार ने अमन मणि को आगे किया था, वहीं कई विवादों में घिरकर भी अमन मणि खुद की सक्रियता बनाए हुए थे।
वह लगातार सपा के दिग्गज नेताओं के करीब बने रहे। इस बीच 2012 के विधानसभा चुनाव में जिन कुंवर कौशल सिंह मुन्ना ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अमनमणि को चुनाव में पराजित किया था, वहीं मुन्ना इस दफा सपा टिकट के मुख्य दावेदारों में गिने जाते रहे।
कुछ समय पहले सपा उम्मीदवारों की घोषणा में सपा ने अमन मणि को उम्मीदवार घोषित किया तो मुन्ना या उनके समर्थक अवाक तो हुए मगर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। इस बीच सारा कांड में अमनमणि की गिरफ्तारी ने जहां मणि परिवार के सियासी सफर की रफ्तार में अवरोध पैदा कर दिया, वहीं सारा की मां की सीएम से गुहार के बाद यह चर्चा तेज होने लगी कि सपा नौतनवा से प्रत्याशी बदल सकती है।
अब ताजी चर्चा है कि अखिलेश यादव की ओर से सौंपी गई उम्मीदवारों की सूची में अमनमणि का नाम नहीं है। इससे जहां अमन मणि खेमे की चिंता बढ़ गई है, वहीं सपा उम्मीदवारी को लेकर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के अलग-अलग रुख ने चिंता में उन सभी को डाल दिया है, जो सपा उम्मीदवारी की कतार में हैं या जिन्हें पहले सपा प्रत्याशी घोषित किया जा चुका है।