निचलौल। सोहगीबरवा गांव में तेंदुए की लोकेशन नहीं मिल रही है। ऐसे में ग्रामीणों के साथ ही वन विभाग के अधिकारी भी थोड़ी राहत के सांस ले रहे है। हालांकि हमलावर तेंदुए की दहशत से ग्रामीण अभी भी रात में पटाखा फोड़ने के साथ ही लाठी डंडों के साथ पहरेदारी करने को मजबूर हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वन कर्मियों और ग्रामीणों की सजगता के चलते तेंदुआ शायद घने जंगल की ओर लौट चुका है। साेहगीबरवा के ग्रामीण सुभाष, कमलेश, राजेश्वर, अमन आदि ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से गांव में तेंदुए की दहशत बरकरार है। हालांकि पिछले दो दिनों से उसकी किसी हलचल की जानकारी नहीं मिली है। फिलहाल तेंदुए की लोकेशन तलाशने में महराजगंज के शिवपुर और बिहार राज्य के मदनपुर वन रेंज की दो टीमें जुटी हुई हैं।
दोनों टीमें दिन के साथ ही रात में भी आबादी के इर्द-गिर्द खोज कर रही है। वहीं रात के समय ग्रामीण भी टीम की मदद में जुटे हैं। इतना ही नहीं, हमलावर तेंदुआ को आबादी में घुसने से रोकने के लिए वह लोग फटाखा फोड़ने के साथ ही लाठी डंडों के साथ पहरेदारी भी कर रहे हैं।
लोगों ने बताया कि तेंदुए ने पहली बार आठ अगस्त को आबादी के पास दस्तक दी थी। उस दौरान नौका टोला निवासिनी तजमुन निशा की तीन बकरियों पर तेंदुए ने हमला कर मारा डाला था। फिर कुछ दिन लापता रहने के बाद सहेलियों के साथ पशुओं के लिए चारा लेने सिवान में गई किशोरी नमिता पर 15 अगस्त को हमला कर लहूलुहान कर दिया था। ं