कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने में नहीं दिख रही गंभीरता
आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रुचि न लेने से जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ
जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में 8 बेड 10 दिनों से हैं खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए विभाग गंभीर नहीं है। विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक ठीक ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। इसका अंदाजा जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थिति देखकर लगाया जा सकता है। यहां 8 बेड करीब 10 दिनों से खाली हैं।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग व स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाया जाता है। इसके तहत बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा जिले के कुपोषित बच्चों की सूची, स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीम गठित कर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के लिए उचित उपचार किया जाता है। यदि कोई बच्चा गंभीर कुपोषित है, तो उसे आशा व आंगनबाड़ी के सहयोग से जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र मेें भर्ती कराया जाता है। लेकिन आशा व आंगनबाड़ी इस कार्य में रुचि नहीं दिखा रही हैं, जिससे योजना जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। हर माह पोषण पुनर्वास केंद्र में अधिकतर बेड खाली रहते हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र की पोषण विशेषज्ञ पूजा त्रिपाठी ने बताया कि आंगनबाड़ी व आशा द्वारा बच्चों को भर्ती कराए जाने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अपने संपर्क कर बच्चों को भर्ती कराया जा रहा है। 23 मार्च 2020 कोरोना संक्रमण काल से अब तक 53 बच्चे भर्ती हुए हैं, जिन्हें उचित उपचार व स्वस्थ्य बनाने का प्रयास किया गया।
आंकड़े बता रहे नहीं हो रहा है काम
जिला अस्पताल में 23 मार्च 2020 के बाद से कुपोषित बच्चों के भर्ती होने की संख्या बेहद कम है। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र कोरोना के कारण 23 मार्च 2020 को बंद हो गया। इसके बाद पुन: 26 मई 2020 को खोला गया। जिला पोषण पुनर्वास केंद्र प्रभारी डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि मई महीने में कुल 4 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें से एक भी बच्चे आशा व आंगनबाड़ी द्वारा भर्ती नहीं कराया गया। यही हाल जून, जुलाई का रहा। वहीं अगस्त महीने में कुल 11 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें 2 निचलौल ब्लॉक की आंगनबाडी द्वारा भर्ती कराया गया। सितंबर में कुल 3 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें से एक भी बच्चे आशा व आंगनबाड़ी द्वारा भर्ती नहीं कराया गया। वहीं अक्तूबर में आशा द्वारा तीन व आंगनबाड़ी द्वारा 5 अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया। जनवरी में भी पनियरा की एक आंगनबाड़ी द्वारा एक बच्चे को भर्ती कराया गया है।
पंजीकृत बच्चों की संख्या
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में कुल 3133 केंद्र संचालित हैं, जिसमें करीब सात माह से तीन वर्ष तक के 1,51,426 और तीन वर्ष से 6 वर्ष तक के 96,798 बच्चे पंजीकृत हैं। गर्भवती व धात्री महिलाएं 54024, अति कुपोषित बच्चे 4999 एवं 11 से 14 वर्ष की 1824 किशोरी पंजीकृत हैं।
शासन की ओर से संचालित योजनाओं के माध्यम से कुपोषण को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जहां पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती की बात है तो अभियान चलाकर कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाएगा। डीपीओ एवं सीएमओ को निर्देशित किया गया है कि लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के कार्रवाई करें।
डॉ. उज्ज्वल कुमार, डीएम