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Maharajganj News: भारत के गुड़ से नेपाल में बन रही है शराब

Thu, 27 Mar 2025 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज/ निचलौल। थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में संचालित होने वाली क्रशर उत्पादित गुड़ (जेरी) इन दिनों तस्करों के निशाने पर बना हुआ है। तस्कर मोटी रकम कमाने के लिए अब गुड़ की बड़े पैमाने पर तस्करी कर नेपाल भेज रहे हैं।
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इसका खुलासा तब हुआ तब पुलिस, राजस्व और एसएसबी की संयुक्त टीम बीते 25 मार्च को कनमिसवा बाॅर्डर पर छापा मारा। सूत्रों के मुताबिक भारतीय गुड़ से नेपाल में शराब बनाया जा रहा है। इसके चलते नेपाल में गुड़ की मांग बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक भारत नेपाल की खुले बाॅर्डर पर अब तक भारत से चीनी, गेहूं, चावल, ब्रान और कपड़े की बड़े पैमाने पर तस्करी होती रही है। इन दिनों नेपाल में गुड़ की मांग बढ़ने से इसकी भी तस्करी बढ़ गई है। इसके लिए तस्करों ने सबसे मुफीद रास्ता कनमिसवा बाॅर्डर को चुना है।
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बुधवार को भारत नेपाल बाॅर्डर से सटे गांव के लोगों ने तस्करों के डर से नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इन दिनों नेपाल में गन्ने की फसल समाप्त हो गई है। इसके चलते नेपाल में गुड़ की कीमत में काफी उछाल है। वहीं भारतीय सीमा क्षेत्र में अभी भी तमाम ऐसे किसान है, जिनके गन्ने की फसल खेतों में खड़ी है।
वहीं जेएचवी शुगर मिल बंद होने से अब गन्ने की पेराई सीमावर्ती क्षेत्र के क्रेशर पर हो रहा है। इससे गुड़ का उत्पादन किया जा रहा है। इसका भारतीय क्षेत्र में गुणवत्ता के आधार पर प्रतिकिलो 38 से 50 रुपये तक है। वहीं बाॅर्डर पार होते ही नेपाल में इसकी कीमत 48 से 60 रुपये प्रतिकिलो हो जा रही है।
भारतीय क्रशर से लेकर नेपाल राष्ट्र के काठमांडू, नारायण घाट, नवलपरासी, भैरहवा सहित अन्य जगहों पर पहुंचाने के लिए अलग अलग लोगों की जिम्मेदारी होती है। तस्करों की ओर से पहले भारतीय क्रेशर संचालकों को गुड़ (जेरी) बनाने के लिए आर्डर दिया जाता है। जब क्रेशर पर इसका बड़ा खेप तैयार हो जाता है। तो तस्कर इसे वाहनों पर लोड कर बार्डर के करीब नाका के पास तिरपाल से ढककर खड़ा कर देते है। निचलौल कस्टम अधीक्षक केएन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि बार्डर पर गुड़ तस्करी का मामला पहली बार आया है। ि
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