महराजगंज। सर्दी में लगातार बढ़ोतरी का क्रम जारी है। परिषदीय स्कूलों में शिक्षक अभिभावकों पर दबाव बना रहे कि बच्चों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्वेटर में ही स्कूल भेजें। लेकिन, जिले में 15 हजार से अधिक बच्चे ऐसे हैं जिनके अभिभावकों के खाते में डीबीटी की रकम अबतक नहीं भेजी गई है जिससे वह बच्चे ठंड में बिना स्वेटर के ही स्कूल पहुंच रहे हैं।
जनपद में 1705 परिषदीय स्कूलों का संचालन हो रहा है जिसमें 2.48 लाख बच्चे नामांकित हैं। नामांकित बच्चों के अभिभावक खाते में डीबीटी के जरिये 12 सौ रुपये की धनराशि अभिभावक के खाते में भेजी जाती है जिससे वह बच्चों के लिए दो सेट यूनीफॉर्म, स्वेटर, बैग और जूता मोजा खरीद सकें। लेकिन, धनराशि पाने के बाद भी तमाम अभिभावक ऐसे हैं जिन्होंने बच्चों का स्वेटर अभी तक नहीं खरीदा।
स्कूल में इन दिनों शिक्षक बच्चों पर दबाव बनाते हैं कि स्वेटर में स्कूल पहुंचे, लेकिन जब स्वेटर खरीदा ही नहीं गया तो बच्चे इसे पहन कर कैसे पहुंचे। खरीदारी न करने के पीछे अभिभावकों का तर्क भी काफी हद तक विचारणीय है। जिन अभिभावनों के खाते में डीबीटी नहीं पहुंची उनका जवाब है कि जब डीबीटी पहुंची ही नहीं तो स्वेट कैसे खरीदें, वहीं पैसे पाने के बाद भी खरीद न करने वाले बताते हैं कि 12 सौ में दो सेट ड्रेस मिल जाए वही बहुत है। स्वेटर, जूता, बैग के लिए पैसा ही नहीं बचता कि इसकी खरीद करें।
डीबीटी के लिए यह जरूरी हैं दस्तावेज : परिषदीय स्कूल के बच्चों के अभिभावक खाते में 1200 रुपये की राशि पहुंचे इसके लिए विद्यार्थी का आधार कार्ड, अभिभावक का बैंक खाता नंबर, अभिभावक का आधार कार्ड अटैच रहना जरूरी है।
मोबाइल नंबर डीबीटी लाभ के लिए जरूरी है। इसके अलावा सबसे आवश्यक विद्यार्थी का जन्म प्रमाणपत्र है जिसकी प्रति डीबीटी के लिए इस वर्ष से अनिवार्य कर दी गई है। अन्य दस्तावेज प्रबंध तो अभिभावक किसी तरह पूर्ण कर लेते हैं, लेकिन जन्म प्रमाणपत्र के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रधान के चक्कर लगाते हैं।
जन्मतिथि न मिलने पर डीबीटी से विद्यार्थी वंचित हो जाते: जन्मतिथि न मिलने पर डीबीटी से विद्यार्थी वंचित हो जाते हैं। इस बार डीबीटी से वंचित बच्चों में अधिकतर जन्म प्रमाणपत्र की शर्त से वंचित हैं।
आधार बनाने की व्यवस्था सभी बीआरसी में है। इसके लिए एक अनुदेशक को आईडी और पासवर्ड भी विभाग ने दे रखा है। इस सुविधा का लाभ विद्यार्थी अपने अभिभावक और शिक्षक की मौजूदगी में बीआरसी से ले सकते हैं। सदर बीआरसी में इसकी जानकारी ली गई तो खंड शिक्षा अधिकारी अंकिता सिंह ने बताया कि जब आधार निर्माण के लिए शिक्षक या अभिभावक बच्चों को बीआरसी लाते हैं प्रकिया उसी समय प्रभावी रहती है। इस समय लगभग सभी नामांकित बच्चों के आधार कार्ड बन चुके हैं और आधार के लिए किसी स्कूल से विद्यार्थी नहीं आ रहे।