महराजगंज। मोबाइल और कंप्यूटर की लत मासूमों को हड्डी का रोगी बना रही है। कोई कमर तो कोई गर्दन दर्द से परेशान है। खेल में कम रुचि होने से हड्डियां कमजोर हो रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में पांच से छह मरीज रोजाना इससे पीड़ित पहुंच रहे हैं।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास ने बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर की लत बच्चों में कई विकार पैदा कर रही है। उम्रदराज लोगों को होने वाला कमर व गर्दन दर्द अब बच्चों में होने लगा है। इसकी वजह पलंग, कुर्सी, सोफा पर आराम की मुद्रा में बैठकर बच्चों का कई घंटे तक मोबाइल देखना है। बच्चे मोबाइल पर खेल खेलने में इतना डूब जाते हैं कि खेलते-खेलते सो भी जाते हैं।
इससे बच्चों के बैठने का तरीका बदल जाता है और हड्डियों पर असर पड़ता है। लगातार गर्दन झुकाए रखना भी दर्द की वजह है। इससे स्पांडलाइटिस की भी समस्या हो जाती है। उन्होंने बताया कि ज्यादा कमरे में रहने की वजह से भी बच्चों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। विटामिन डी-3 की कमी से शरीर कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने बताया कि अब प्रत्येक दिन पांच से छह मरीज इस समस्या से पीड़ित आते हैं।
बाहर निकलना पसंद नहीं कर रहे बच्चे
हड्डी रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चे खेलने की उम्र में बाहर निकलना पसंद नहीं कर रहे हैं, जो अच्छे संकेत नहीं हैं। बच्चों की हड्डियां कमजोर होती जा रही हैं, जो आने वाले समय में काफी कष्टदायी होगी। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेजें। यह चिंता की वजह है कि पांच से 10 वर्ष के बच्चे कमर और गर्दन दर्द के रोगी हो रहे हैं। इनकी संख्या पांच साल में काफी बढ़ गई है। इन दिनों पांच से छह बच्चे रोजाना उपचार कराने आ रहे हैं।