नौतनवा तहसील क्षेत्र में एक गांव है सेमरहवा। गांव एक तरफ से सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग उत्तरी चौक रेंज के टेढ़ी घाट बीट के जंगल और तीन तरफ से रोहिन और बघेला नदी के बीच बसा है। चार टोले में बसे छह हजार की आबादी वाले इस गांव में आज तक इस विकास तो छोड़िए उसकी परछाईं तक नहीं पहुंची। दूसरे गांव तक जाने के लिए सड़क नहीं नाव ही एकमात्र सहारा है। बरसों से लोगों की मांग के बावजूद आज तक नदी पर पुल नहीं बना। हां! जब पानी कम रहता है तब लोग नदी में गाड़ी लेकर चले जाते हैं, लेकिन बरसात के समय तो दुश्वारी काफी बढ़ जाती है।
इस दुश्वारी का एक नजारा दिखा मंगलवार को। गांव के बैजनाथ यादव उर्फ मंजनू के बेटी बेबी की शादी थी। नौतनवा थाना क्षेत्र के गांव बैरवा बनकटवा के हरिराम यादव बेटे विजय की बरात लेकर सेमरहवा के लिए चले। लेकिन रोहिन नदी के उफान पर होने के कारण बरातियों को गाड़ी छोड़कर नाव से नदी पार करनी पड़ी और फिर करीब तीन किमी पैदल सिर पर सामान रखे बैजनाथ के दरवाजे पर पहुंचे। इसके बाद शादी की रश्में हुईं। बुधवार सुबह बरात की विदाई हुई। एक बार फिर वही नजारा दिखा। बराती फिर सामान सिर पर रखकर रोहिन नदी के कुआहवा घाट पहुंचे और नाव से उस पार गए। लगभग 11 बजे दुल्हन बेबी भी पति विजय के साथ पैदल ही बारिश होने से फिसलन के बीच घाट पर पहुंची और नाव से नदी पार कर अपनी ससुराल रवाना हुई।
ग्रामीणाें का कहना है कि न जाने कितनी बार जनप्रतिनिधियों से नदी पर पुल बनाने की मांग की गई, हर बार सिर्फ आश्वासन मिला लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। इस तरह की परेशानियों से सभी आजिज आ चुके हैं। नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने बीते लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था। ग्रामीणों का कहना है कि शादी विवाह के अलावा आपात परिस्थिति में भी काफी मुश्किल होती है। मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए काफी जतन करने पड़ते हैं। इन सबके बावजूद कोई गांव की परेशानियों की सुधि नहीं ले रहा।