महराजगंज। चार ग्राम पंचायतों में शासन से मिले विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। लेखा परीक्षा विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2017-2018 की गई ऑडिट रिपोर्ट में चार ग्राम पंचायतों बरवा फहीम, महुअवा, परतावल और हरपुर तिवारी में कुल 4,88,860 रुपये के सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट में यह साफ तौर पर बताया गया है कि संबंधित तत्कालीन ग्राम प्रधानों और तत्कालीन सचिवों ने मिली धनराशि का अनुचित उपयोग किया है। लेखा परीक्षा विभाग ने इस संबंध में जिला प्रशासन, पंचायत राज विभाग और शासन को पत्र भेजकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा ने 21 जनवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
वहीं, जिलाधिकारी अनुनय झा ने भी 25 जनवरी को नोटिस जारी कर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा था। बावजूद इसके, किसी भी ग्राम प्रधान या सचिव ने न तो ऑडिट आपत्तियों का निवारण किया और न ही कोई स्पष्टीकरण या जवाबदेही प्रस्तुत की।
जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी किए गए पत्र में बताया गया है कि ग्राम पंचायत हरपुर तिवारी में 19,360 रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि की गई है। जिलाधिकारी ने हसीलदार सदर को निर्देश दिया है कि इस राशि का आधा भाग—9,680 रुपये तत्कालीन ग्राम प्रधान रमेश यादव से भू-राजस्व बकाए की तरह वसूल किया जाए।
वहीं, शेष 9,680 रुपये की वसूली तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव हेमंत कुमार से जिला विकास अधिकारी के माध्यम से की वसूली किया जाएं। वसूली के पश्चात यह धनराशि ग्राम पंचायत हरपुर तिवारी के ग्राम निधि प्रथम खाता में जमा कराई जाएगी।
वहीं, ग्राम पंचायत परतावल में वित्तीय अनियमितता सबसे ज्यादा गोलमाल का रिपोर्ट प्रकाश में आया है। जहां 2,10,196 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। डीएम कार्यालय से जारी निर्देश के अनुसार, तहसीलदार सदर इस राशि का आधा भाग 1,05,098 रुपये तत्कालीन ग्राम प्रधान उमेश्वरी देवी से भू-राजस्व की तर्ज पर वसूला जाएगा।
इसके अतिरिक्त, शेष 1,05,098 रुपये की वसूली तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव हेमंत कुमार से कर जिला विकास अधिकारी की ओर से निधि खाते में जमा कराई जाएगी।
इसके अलावा ग्राम पंचायत महुअवा में 16,500 रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग पाया गया है। जांच के बाद जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर को निर्देश दिया है कि तत्कालीन ग्राम प्रधान जयराम से 8,250 रुपये की राशि भू-राजस्व के रूप में वसूल की जाए।