महराजगंज। जिले में नशे की दवाओं का धंधा तेज से फल-फूल रहा है। इसमें गैर लाइसेंसी दुकानों से करोड़ों की दवाओं का वारा-न्यारा हो रहा है। सूत्रों की मानें तो गोरखपुर की मंडी से दवा लाने के साथ ही उत्तराखंड से सीधे दवाएं मंगाई जाती हैं। कुछ लाइसेंसी दुकान भी इस धंधे में लिप्त बताए जा रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सीमावर्ती क्षेत्र में गुमटी में मेडिकल स्टोर संचालित हो रहा है। यही नहीं, पशु आहार के साथ अंग्रेजी दवाएं भी बिक रही हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र में नशे की दवा के सिंडिकेट को समझने के लिए क्षेत्र में भ्रमण करना पड़ा। इस पूरे खेल में बड़ा झोल नजर आ रहा है। नियम-कानून के अनुसार दुकानों को संचालित कराने का दावा करने वाले जिम्मेदार इधर देखना मुनासिब नहीं समझते हैं। नशे की दवाओं की खेप पहले भी बरामद हो चुकी है। कार्रवाई भी की गई।
धंधेबाजे जब शिकंजा कसा जाता है तो वे कुछ दिन खामोश रहने के बाद तरीका बदलकर तस्करी का धंधा शुरू कर देते हैं। करोड़ों के इस धंधे के सिंडिकेट को जिम्मेदार तोड़ नहीं पा रहे हैं। सूत्र की मानें तो धंधेबाज मौका देखकर नेपाल के अंदर नशे की दवाओं की आपूर्ति करते हैं।
सीमावर्ती इलाकों को जो तस्वीर दिखी, उसे देखकर हर कोई चौक जाएगा। नौतनवा क्षेत्र में एक स्थान पर मेडिकल स्टोर का बोर्ड दिखा। मगर, कमरे में पशु आहार रखा हुआ था। अंग्रेजी दवाएं भी रखी थीं। पास में खड़े एक शख्स ने बताया कि यहां सबकुछ ऐसे ही चलता है। दिखाने के लिए कुछ और होता है। मगर, काम कुछ और होता है। निचलौल तहसील क्षेत्र में बहुआर की ओर जाने पर गुमटी में मेडिकल स्टोर संचालित होते मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि छापा के पहले धंधेबाजों को जानकारी हो जाती है।
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धंधेबाजों ने बदल लिया काम का तरीका
नशे की लत में फंसे युवाओं की बढ़ती मांग की वजह से नशे की दवाओं की खपत नेपाल में बढ़ गई है। सीमा क्षेत्र में बढ़ती सख्ती के कारण धंधेबाजों ने काम का तरीका भी बदल लिया है। सूत्रों की मानें तो अब दुकान पर फर्जी बैनर-बोर्ड लगाकर तस्करी की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। जनपद के सीमावर्ती गांव में ऐसे भी दुकान हैं जिसके पास लाइसेंस नहीं है। मेडिकल स्टोर के नाम पर गोरखपुर से प्रतिबंधित दवा लाकर नेपाल में आपूर्ति की जा रही है। नशे की दवाओं की खेप सीमा क्षेत्र के नौतनवा, कोल्हुई, सोनौली, भगवानपुर, खनुआ, बरगदवा, सिसवा और ठूठीबारी आदि ठिकानों पर एकत्र की जाती है। पगडंडी के जरिये करियर के माध्यम से नेपाल की सीमा में दाखिल कर काठमांडू व पोखरा सहित बड़े बाजारों में पहुंचा दी जा रही है।
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सबसे अधिक इंजेक्शन की खपत
सूत्र बताते हैं कि नेपाल में सबसे अधिक नशे की इंजेक्शन की खपत होती है। नशे की दवाओं का नेटवर्क नेपाल में भी काफी मजबूत है। धंधेबाज प्रतिबंधित दवाओं को बड़े शहरों से खरीद कर सीमा क्षेत्र में लाकर करियर के माध्यम से नेपाल में पहुंचा देते हैं।
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कोट
ऐसी शिकायत किसी ने नहीं की। यदि ऐसी बात है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। नियम के अनुसार ही दुकानें संचालित होंगी।
- डीपी मौर्य, औषधि निरीक्षक