घुघली। शिकारपुर के अगया गांव के पास से निकलने वाला मौन नाला बारीगांव सहित आसपास क्षेत्र के लिए आफत बना है। जिले का अंतिम छोर होने के कारण यहां शासन-प्रशासन की नजर नहीं पहुंच पाती है। आलम यह है कि इस नाले के दोनों तरफ की लगभग 15 से अधिक गांवों की फसलें बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। वहीं बारी गांव में कुछ घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
एक सप्ताह से बारिश से किसानों के होश उड़े हुए हैं। 80 प्रतिशत किसानों के खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है। क्षेत्र के किसान विद्या सिंह ने कहा की लगभग सात वर्ष हो गया मौन नाले की सफाई नहीं हुई और नाले के अंतिम छोर पर इंदरपुर में पानी निकासी के लिए बनाया गया है। मुख्य मार्ग पर पुल का दो खाना बंद कर दिया गया है। केवल एक खाना ही खोला गया है। नाले की सफाई न होना यही कारण है।
मौन नाला नाले का बंधा टूट गया है। बारी गांव, नेबुईया, बड़हरा, धनगढ़ी, मुंडेरी, चौमुखा, प्यास, हरखा, आदि गांवों में बढ़ का पानी गांव के पास आ गया है। 15 किलोमीटर के दायरे में फैसलें जलमग्न हो गई है। नेबुइया निवासी अजय सिंह ने बताया की प्रशासन को हर वर्ष इस संबंध में सूचना दी जाती है। वर्ष यही हाल होता है। हजारों किसानों का धान की फसल केवल प्रशासनिक लापरवाही के कारण बर्बाद हो जाता है।