महराजगंज। जनपद में करीब 2800 हेक्टेयर में आम का बागीचा है। भुनगा कीट का प्रयोग नई कोपलों, इससे बनने वाले छोटे-छोटे फलों में होता है। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है। ये कीट प्रकोप वाले हिस्से पर शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ते हैं। इसके चलते पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जमा हो जाती है। वहीं, पत्तियों द्वारा होने वाला प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
उद्यान निरीक्षक विकास श्रीनेत ने बताया कि मिज कीट से फल और डंठल पर सफेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखाई देती है। इस रोग की चपेट में आया हिस्सा पहले पीला हो जाता है। इसके बाद मंजरियां सूखने लगती हैं। आम को भुनगा व मिज कीट से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड तीन मिली प्रति लीटर पानी या क्लोरपोइरीफास या डायमेथोएट दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए तो कीट का प्रकोप समाप्त हो जाता है। इससे अच्छे फल होंगे और अच्छा लाभ मिलेगा। इस समय बौर की देख-रेख अनिवार्य है। मौसम में बदलाव के कारण मौजूदा समय में बौर में खर्रा रोग लगने का खतरा बढ़ इस गया है। इसको लेकर बागवान चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो समय एक से इसकी रोकथाम कर ली जाए तो अच्छे फल आएंगे
उन्होंने बताया कि खर्रा व दहिया रोग के रोकथाम के लिए ट्राइडोमार्क एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव कार्बारिल 0.2 वा क्योनालफ्वस 1.3 मिली और इंडोफिल एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ करने से रोग नहीं लगेंगे। फूल खिलने या फल लगने के दौरान मार्शल 1.5 मिलो या कंटाफ प्लस 1.5 मिली दवा का छिड़काव करने से बेहतर लाभ मिलेगा। फलों के साथ प्राप्त फलों की गुणवत्ता के चलते बागवानों को अच्छे दाम मिल जाते हैं।
ऐसे करें कीट और रोग का नियंत्रण
बसूली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय चंद्रन ने बताया कि खर्रा व दहिया रोग के रोकथाम के लिए ट्राइडोमार्क एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव कार्बारिल 0.2 वा क्योनालफ्वस 1.3 मिली और इंडोफिल एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ करने से रोग नहीं लगेंगे। फूल खिलने या फल लगने के दौरान मार्शल 1.5 मिलो या कंटाफ प्लस 1.5 मिली दवा का छिड़काव करने से बेहतर लाभ मिलेगा।