ग्रामीणों ने लगाई सुरक्षा की गुहार, वनक्षेत्राधिकारी वनकर्मियों संग गांव के आसपास कर रहे तेंदुए की तलाश
लक्ष्मीपुर। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के लक्ष्मीपुर रेंज अंतर्गत वनग्राम अचलगढ़ में पिछले एक सप्ताह के भीतर तेंदुए के दो अलग-अलग हमलों में पांच लोग घायल हो चुके हैं। इन घटनाओं के बाद से ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल है। शाम ढलते ही गांव की गलियां सुनसान हो जा रही हैं और लोग अपने ही घरों में कैद होकर रात बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, छह मई की सुबह करीब छह बजे वनग्राम अचलगढ़ निवासी ईशा (19 वर्ष), पुत्री मंगरू, गांव के समीप जंगल की ओर गई थी। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक उस पर हमला कर दिया। युवती के चीखने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग उसकी ओर दौड़े लेकिन तब तक तेंदुआ हमला कर चुका था। इसी दौरान पास में मौजूद नीरज (16 वर्ष) पुत्र शौकीलाल और मुरलीधर (69 वर्ष) को भी तेंदुए ने घायल कर दिया। ग्रामीणों के शोर मचाने और एकजुट होने पर तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया।
घटना के बाद घायल ईशा की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था जबकि अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। इस घटना से ग्रामीण अभी उबर भी नहीं पाए थे कि 12 मई को तेंदुए ने फिर दो युवकों पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि पप्पू और अनिरुद्ध गांव के समीप मौजूद थे, तभी तेंदुआ अचानक झाड़ियों से बाहर निकल आया और दोनों पर हमला कर दिया। हालांकि इस बार दोनों युवकों को मामूली चोटें आईं और बड़ा हादसा टल गया, लेकिन लगातार दूसरी घटना ने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया।
समूह में घर से बाहर निकल रहे लोग
तेंदुए के लगातार हमलों के बाद ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। लोग अब अकेले घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। खेतों में काम करने जाने वाले किसान भी समूह में जा रहे हैं। मवेशियों को चराने ले जाने वाले ग्रामीण गांव की सीमा से बाहर जाने से डर रहे हैं। बच्चों को अकेले स्कूल भेजना परिवारों ने लगभग बंद कर दिया है। महिलाओं ने सुबह और शाम के समय घर से बाहर निकलना कम कर दिया है। गांव में रात होते ही ऐसा माहौल बन जाता है मानो कर्फ्यू लगा हो। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे इलाके में पहले भी जंगली जानवरों की हलचल देखी जाती रही है, लेकिन तेंदुए का इस तरह बार-बार गांव में आना और लोगों पर हमला करना पहली बार हो रहा है। कई ग्रामीणों ने दावा किया कि हमले के बाद रात के समय गांव की सीमा पर तेंदुए की गतिविधियां देखी गई हैं। इससे लोगों में और भय बढ़ गया है।
ग्राम पंचायत के प्रधान योगेंद्र सहनी ने बताया कि प्रशासन और वन विभाग को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि तेंदुए को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जंगल से सटे लालपुर कल्याणपुर गांव के निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि तेंदुआ कई बार गांव की सीमा के आसपास मंडराता दिखाई दिया है। इससे ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। लोग अब मंदिर, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी कम जा रहे हैं। गांव में हर व्यक्ति के मन में एक ही सवाल है कि आखिर तेंदुआ कब पकड़ा जाएगा और गांव में सामान्य स्थिति कब लौटेगी।
वनविभाग चला रहा सर्च ऑपरेशन
इधर, घटनाओं के बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। वनकर्मियों की टीमें गांव और जंगल के आसपास लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। दिन के साथ-साथ रात में भी गश्त बढ़ा दी गई है। विभाग की ओर से ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अकेले जंगल, खेतों के किनारे या सुनसान रास्तों की ओर न जाएं। गांव में जगह-जगह चेतावनी संबंधी सूचनाएं भी लगाई गई हैं। फिलहाल वनग्राम अचलगढ़ और आसपास के इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वन विभाग जल्द ही तेंदुए को पकड़ने में सफल होगा और गांव में फिर से सामान्य स्थिति बहाल हो सकेगी।
वर्जन
वन विभाग की टीमें लगातार तेंदुए की तलाश में जुटी हुई हैं। तेंदुए की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है और हर संभावित क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि अभी तक तेंदुए का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है लेकिन विभाग पूरी गंभीरता के साथ अभियान चला रहा है। ग्रामीणों से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें।
- वेदप्रकाश शर्मा, लक्ष्मीपुर रेंजर