छह हजार में निपटा एक लाख का स्टांप, निबंधन विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
नौतनवा।
स्थानीय निबंधन विभाग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से आवासीय जमीन को कृषि और व्यावसायिक जमीन को आवासीय दिखाकर कौड़ियों के भाव रजिस्ट्री कराई जा रही है, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।
ताजा मामला ग्राम सभा कैथवलिया उर्फ बरगदही का है, जहां करीब एक लाख रुपये के स्टांप शुल्क वाली जमीन का बैनामा महज छह हजार रुपये में करा दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन खरीदने वाली महिला को इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब अपर जिलाधिकारी न्यायालय से उसे स्टांप शुल्क की कमी का नोटिस मिला। नोटिस लेकर जब वह एसडीएम के पास पहुंची, तब जाकर पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ।
नौतनवा तहसील क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां जमीन की श्रेणी बदलकर कम स्टांप शुल्क में रजिस्ट्री कराई गई है। जानकारों का साफ कहना है कि बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी संभव नहीं है। स्थिति यह है कि इस गड़बड़झाले की भनक खरीदारों को तब लग रही है, जब उन्हें एडीएम न्यायालय से नोटिस मिल रहा है। निबंधन कार्यालय पहुंचने पर उन्हें सिर्फ बकाया स्टांप शुल्क जमा कर मामला निपटाने की सलाह देकर टाल दिया जा रहा है, जबकि जिम्मेदारों को तलाश कर उनपर कार्रवाई नहीं की जा रही।
केस 1:
ग्राम सभा मुड़िला में एक व्यावसायिक जमीन को आवासीय दिखाकर बैनामा कराया गया। शिकायत के बाद एडीएम न्यायालय ने क्रेता प्रमिला देवी को कम स्टांप शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी किया। पीड़ित जब निबंधन कार्यालय पहुंची, तो उसे पूरा शुल्क जमा करने को कहकर लौटा दिया गया।
केस 2:
कैथवलिया उर्फ बरगदही में आवासीय जमीन को कृषि दिखाकर न्यूनतम स्टांप शुल्क पर बैनामा किया गया। मामला उजागर होने पर क्रेता गीता को नोटिस मिला। महिला ने एसडीएम के समक्ष खुद को अनजान बताते हुए न्याय की गुहार लगाई।
वर्जन
शिकायत या निरीक्षण में स्टांप शुल्क की कमी पाए जाने पर तत्काल संज्ञान लेकर क्रेता को नोटिस जारी कर निस्तारण कराया जाता है। नियमों के विपरीत किसी भी कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। -आलोक शुक्ला, सहायक महानिरीक्षक, निबंधन