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Maharajganj News: सिंचाई विभाग में घोटालों की खुल रहीं परतें

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-एक करोड़ के गोलमाल में दो अफसरों के खिलाफ केस र्द
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-14 दिसंबर 2022 का मामला : उत्तर प्रदेश शासन सिंचाई एवं जल संसाधान अनुभाग-6, कार्यालय प्रमुख अभियंता (जांच अनुभाग) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उप्र लखनऊ ने की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सिंचाई विभाग में सरकारी धन के दुरुपयोग की कलई परत-दर-परत खुल रही है। बीते माह रोहीन वीयर प्रकरण में सेवानिवृत चार अभियंताओं पर केस दर्ज हुआ था। अब मौन नाला पुनर्स्थापना कार्य की परियोजना में एक करोड़ के भुगतान में गड़बड़ झाला पाया गया है। इसमें भी सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता फंस गए। इस मामले में दोनों अधिकारियों पर केस दर्ज कराया गया है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने के मामले में कार्रवाई हुई है।
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तहरीर के अनुसार, 14 दिसंबर 2022 को अवध कुमार सिंह तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने 104.558 लाख के कार्यों का भुगतान न कर देनदारियां सृजित कर दीं एवं लालजी सिंह तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा 4.66 लाख के गठित अनुबंध के सापेक्ष 4.74 लाख का भुगतान किया गया है। दोनों अधिकारियों ने दायित्व निर्वहन के दौरान गंभीरता नहीं बरती। इस वजह से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। अवध कुमार सिंह तत्कालीन अधिशासी अभियंता 17 जून 2005 से 20 फरवरी 2007 तक सिंचाई खंड-दो में अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत रहे।
इस बीच मौन नाले की क्षमता पुनर्स्थापना कार्य की परियोजना तैयार हुई थी। स्थायी संचालन समिति की 21वीं बैठक 6 जुलाई 2005 को हुई थी, इसमें कार्य कराने के लिए 416.24 लाख रुपये स्वीकृत हुए। तत्कालीन अधिशासी अभियंता द्वारा इस परियोजना पर लागत 448.75 लाख स्वीकृति कर 372.306 लाख का अनुबंध किया गया। इस परियोजना पर 400 लाख का आवंटन मिला। इसके सापेक्ष 295.442 लाख का भुगतान कार्यों पर किया गया। शेष 104.558 लाख बचत हुई।
बचत की धनराशि को परियोजना पर भुगतान न कर अन्य कार्यों पर कर दिया गया। इसकी जांच में अवध कुमार सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियंता दोषी मिले। स्वीकृत परियोजना 416.24 लाख में से 4.66 लाख के कार्यों को टुकडों में बांटकर लालजी सिंह, सहायक अभियंता द्वारा अनुबंध किया गया। इसके सापेक्ष 4.74 लाख का भुगतान हुआ। बचत की धनराशि 0.08 लाख शासकीय क्षति हुई। इस पर उत्तर प्रदेश शासन सिंचाई एवं जल संसाधन अनुभाग-6, कार्यालय प्रमुख अभियंता (जांच अनुभाग) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उप्र लखनऊ की ओर से इनके विरुद्ध वित्तीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
सूत्रों पर यकीन करें तो पद पर रहने के दौरान अभियंताओं ने मामले को खुलने नहीं दिया। इनके सेवानिवृत होने के बाद काले कारनामे की पोल खुल गई। सेवानिवृत होने के बाद मुश्किल बढ़ गई है।
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सेवानिवृत अधिशासी के खिलाफ सिविल सूट दाखिल
अवध कुमार सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियंता महराजगंज के विरुद्ध शासकीय अधिवक्ता, महराजगंज के माध्यम से सिविल सूट दाखिल कर दिया गया है। अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड-द्वितीय, महराजगंज की ओर से अवध कुमार सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियंता एवं लालजी सिंह तत्कालीन सहायक अभियंता के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए सहायक अभियंता चतुर्थ को निर्देशित किया गया। इसके बाद सदर कोतवाली में तहरीर दी गई।
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रोहिन वीयर निर्माण में 229 लाख का शासन को हुआ नुकसान

महराजगंज। रोहिन वीयर निर्माण में 229 लाख का नुकसान शासन को हुआ है। जांच में गड़बड़ी सामने आने पर 22 सितंबर को सदर कोतवाली में केस दर्ज कराया गया था। सेवानिवृत होने के बाद चार अभियंताओं की कारस्तानी की पोल खुली थी। 22 अक्तूबर 2007 को स्थल पर रोहिन वीयर निर्माण की परियोजना लागत को बढ़ा दिया गया था। स्वीकृत ड्राइंग में वीयर के स्थान पर बैराज का निर्माण का प्रावधान किया गया। शासन से स्वीकृत परियोजना एवं स्वीकृत प्राक्कलन विपरीत कार्य कराकर सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन किया गया। इससे शासन को 229 लाख की क्षति हुई। मुख्य अभियंता (गंडक) के पद पर कार्य करते हुए बटुकेश्वर प्रताप सिंह द्वारा रोहिन वीयर के स्थान पर बैराज की ड्राइंग स्वीकृति में अनियमितताएं की गईं थी। त्रुटिपूर्ण परिकल्पना के आधार पर ड्राइंग स्वीकृत कर शासन को 229 लाख की क्षति पहुंचाई गई। ड्राइंग का विधिवत तकनीकी परीक्षण किए बगैर 14 मार्च 2008 को स्वीकृत किया गया।
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