महराजगंज। 11 जुलाई को सोनौली सीमा के पिलर संख्या 516 (22) से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ा जार्डन से पुलिस लाइंस में पूछताछ हो रही है। उसके भारत आने व नेपाल जाने के उद्देश्य का अब तक पता नहीं लग सका है। वहीं सूत्र बताते हैं कि अमेरिकी दूतावास भी पूछताछ की जानकारी के अपडेट लोकल इंटेलिजेंस से ले रहा है।
जानकारी के अनुसार, बिना वीजा पासपोर्ट नेपाल जाते समय पकड़े गए जार्डन पर एसएसबी 22वीं वाहिनी की तहरीर पर सोनौली थाने में आव्रजन व विदेश अधिनियम 2025 के तहत 11 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उसे सोनौली थाने में रखकर पहले पुलिस, लोकल इंटेलिजेंस, राज्य व केंद्रीय जांच एजेंसियों ने कई चरणों में पूछताछ की लेकिन वह सुरक्षा एजेंसियों को अलग-अलग बयान देता रहा।
किसी से खुद को अमेरिकन नेवी सील्स का कमांडो बताया तो किसी को कांट्रेक्ट पर भारत आने की जानकारी देकर जांच एजेंसियों को भटकाने की कोशिश की। 13 जुलाई को उसे न्यायालय प्रस्तुत किया गया तो न्यायालय ने उसे 14 दिन के लिए कारागार भेज दिया। इसी बीच कारागार में अमेरिकी दूतावास की टीम पहुंची। 17 जुलाई को 14 दिन के लिए कारागार गए जार्डन के रिमांड के लिए पुलिस ने न्यायालय में आवेदन किए। रिमांड मंजूरी के बाद शनिवार को उसे कारागार से स्थानीय पुलिस ले गई। यहां जार्डन से सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ में जुटी हैं। एजेंसियां पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि उसकी वास्तविक पहचान क्या है, वह भारत किसलिए आया है था और नेपाल क्यों जाना चाहता है।
राज, चेतन व नाज के नाम काल्पनिक होने की आशंका : शुरुआती पूछताछ में जार्डन ने राज, चेतन व नाज के नाम का जिक्र किया था। लेकिन पुलिस व एजेंसियों की पड़ताल में इन तीनों का वजूद नहीं मिला और वह सोनौली किसी ट्रेवेल वाहन से नहीं बल्कि रोडवेज बस के जरिये पहुंचा था। जिस नाज के बारे में जार्डन पगडंडी मार्ग बताने के दौरान एसएसबी के डर से नेपाल की तरफ भागने के बारे में बता रहा है। उसे एसएसबी के 22 वीं वाहिनी के किसी जवान ने नहीं देखा।
सूत्रों के मुताबिक, अगर इस बात पर यकीन भी करें तो नाज जब उसे छोड़ने भारतीय क्षेत्र से ही आया था तो भागकर नेपाल जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। ऐसे में खुफिया तंत्र इन तीनों नामों को काल्पनिक मान रहा है लेकिन पड़ताल में इन्हें अभी भी रखा गया है। इसके अलावा उत्तराखंड की जिस योग टीचर से जार्डन शादी की बात कर रहा उसके बारे में भी उत्तराखंड से जानकारी जुटाई जा रही है।
खुल रही ट्रैवेल हिस्ट्री
पुलिस लाइंस में जार्डन से पूछताछ में जुटी एक सुरक्षा एजेंसी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जार्डन अभी भी अलग-अलग बयान देकर भारत आने का कारण नहीं बता रहा है। हालांकि उसकी ट्रैवेल हिस्ट्री पड़ताल में पुष्ट होती जा रही है। ट्रैवेल हिस्ट्री व पूछताछ के मुताबिक वह मार्च 2026 के आखिरी सप्ताह से मई के पहले सप्ताह तक दक्षिणी गोवा के कानाकोना में रहा था। 10 मई के बाद से जुलाई प्रथम सप्ताह तक कर्नाटक के मैसूर रहा। आठ जुलाई को वह बंगलुरू से हैदराबाद गया। बंगलुरू से मध्य प्रदेश के सिवली होते हुए वह प्रयाग पहुंचा। वहां से वह 11 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा के सोनौली बार्डर तक पहुंचा।
वर्जन
जार्डन कारागार से पुलिस रिमांड के लिए जा चुका है। पुलिस उसे कहां रखकर क्या पूछताछ कर रही है वह उनका विषय है। उसे 24 जुलाई को न्यायालय में पुलिस पेश करेगी। इसके बाद तय होगा कि उसे कारागार भेजा जाएगा अथवा रिमांड बढ़ेगी।
-वीके गौतम, अधीक्षक जिला कारागार, महराजगंज