महराजगंज। अगर आप भी सस्ती दवा लेने के इरादे से जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने जा रहे हैं तो सतर्क रहें। क्योंकि, यहां मोटी रकम कमाने के चक्कर में सस्ती दवाओं की वजह ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं बेची जा रही हैं। जेनेरिक दवाओं के जगह पर मरीजों को महंगी दवाएं दी जा रही हैं। जांच में इसका खुलासा हुआ है। त्रिस्तरीय टीम मामले की जांच रिपोर्ट जल्दी सीएमओ का सौंपेगी। शहर में जिला अस्पताल व काॅलेज रोड पर जन औषधि केंद्र है। वहीं अन्य स्थानों पर भी है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सस्ती और बेहतर जेनेरिक दवाएं जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध हैं। मरीजों का उनका इस्तेमाल करना चाहिए। जबकि हकीकत यह है कि ब्रांडेड दवाओं के खेल में मरीज और तीमारदार हर दिन पिस रहे हैं। मरीजों महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र पर ग्राहकों की भीड़ कम दिखी। कुछ लोग दवा खरीद रहे थे। कर्मचारी आपस में बातचीत कर रहे थे, क्याेंकि, बीते दिन जांच टीम पहुंची थी तो यहां कर्मियों ने टीम को सही तरीके से जानकारी नहीं दी। जांच में इस बात का पता चला था कि यहां ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही हैं। यहां मिले एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर जन औषधि केंद्र की गतिविधियों को बयां किया। उसके मुताबिक जन औषधि केंद्र पर अधिक लाभ मिलने वाली दवाएं बेची जाती थीं, यहां ग्राहकों की संख्या अधिक होती है। लोग जानते हैं कि यहां सस्ती दवा मिलती है। ऐसे में ग्राहकों की अच्छी खासी संख्या का फायदा उठाकर दूसरी कंपनियों की दवाएं बेची जा रहीं थीं।
तीमारदार सत्येंद्र कुमार ने बताया कि चार दिन पहले एक मरीज को लेकर आया था, अब उसकी हालत में सुधार है। यहां दवा खरीदने आया था तो पांच प्रकार की दवा में दो सस्ती थी, लेकिन तीन दवाएं महंगी मिली थी। जरूरत होने के कारण बहस नहीं की, क्योंकि उससे कोई फायदा नहीं होता। इस कारण दवा लेकर चला गया। कारनामा उजागर होने के बाद पड़ताल के दौरान लोगों ने यहां की कथनी-करनी की पोल खोलनी शुरू की। दीपेंद्र वर्मा ने बताया कि जन औषधि केंद्र से ब्रांडेड दवा बिक्री करने का खेल करीब छह माह से चल रहा था। ग्राहक आने पर बाहर की दुकानों से सेटिंग कर त्वरित दवा मंगा लिया जाता था। सूत्र बता रहे हैं कि अस्पताल परिसर में घूमने वाले दलालों से भी सेटिंग थी, अगर किसी ग्राहक को 10 दवा लेनी है तो उसे सस्ती वाली एक दो दवा देकर दूसरी दवा कुछ देर में लेने की बात कही जाती थी, इस खेल को कोई समझ नहीं पाता था। क्योंकि कुछ दवा तो सस्ते में मिल जाती थी। ग्राहकाें को कुछ देर रोककर बाहर से दवा लाकर सीधे बेच दिया जा रहा था। कभी-कभी दवा काउंटर में भी रख दी जाती थी। सूत्र बताते हैं कि इससे सप्ताह का लाखों का वारा न्यारा हो जाता था।
यह होता है दवाओं के दाम में अंतर
शुगर मरीजों को दी जाने वाली दवा गलिमिप्राइड (दो एमजी) के 15 टेबलेट के पैक की कीमत जन औषधि केंद्र में 24 रुपये हैं। विल्डाग्लीप्टीन (50 एमजी) के 15 टेबलेट के पैक की कीमत 50 रुपये हैं। जबकि, बाजार में इसी कंपोजीशन की ब्रांडेड कंपनी की दवा 150 से 250 रुपये में मिल रही है। बीपी में दी जाने वाली दवा टेलमीसार्टन (40 एमजी) के 10 टेबलेट के पैक की कीमत 12 रुपये और 20 एमजी के पैक की कीमत 17 रुपये हैं। जबकि, बाजार में ब्रांडेड दवा की कीमत 120 से 160 रुपये हैं। चर्म रोग की दवा लूलीकोनाजोल क्रीम की कीमत जन औषधि केंद्र पर 22 रुपये है। जबकि, इसी साल्ट की क्रीम बाजार में 150 रुपये में मिल रही है। इसमें केवल कंपनी का नाम बदला है, जबकि साल्ट वही है। इस तरह से बाहर की दवा लाकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है।
शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई गई है। टीम से अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. श्रीकांत शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी