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Maharajganj News: इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट.. सुस्त गति से निर्माण, समय से पूरा होना मुश्किल

Mon, 10 Mar 2025 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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निर्माणाधीन इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का भवन।
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महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा सोनौली में इंटीग्रेटेड पोस्ट की चहारदीवारी बन चुकी है। वेयरहाउस का निर्माण भी अंतिम चरण में है। वहीं कार्यालय का भी निर्माण किया जा रहा है। काम बेहद सुस्त गति से होने के कारण समय पर काम पूरा होना मुश्किल है। सोनौली सीमा पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का निर्माण हो रहा है।
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जानकारी के अनुसार भारत-नेपाल सीमा सोनौली में इंटीग्रेटेड पोस्ट की चहारदीवारी बीते वर्ष बन चुकी थी। इसके साथ ही चेकपोस्ट के अंदर तीन कार्यालय सुस्त गति से बन रहे हैं। भवन को बनाने में करीब दो वर्ष का समय लग सकता है। रविवार को कुछ मजदूर काम कर रहे थे। सड़क निर्माण नहीं हुआ है। केवटलिया के राकेश ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा को व्यापार से जोड़ने के लिए सोनौली में बन रहे इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का निर्माण सुस्त गति से हो रहा है। अभी तक करीब 20 प्रतिशत ही काम हुआ है। जिम्मेदारों के मुताबिक बौद्ध सर्किट के अंतरराष्ट्रीय एक्जिट प्वाइंट सोनौली में एयरपोर्ट की तर्ज पर 116.9 एकड़ कैंपस में आईसीपी लैंडपोर्ट बन रहा है। भूमि अधिग्रहण के बाद लैंडपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने चहारदीवारी का निर्माण कार्य पूरा करा दिया है। इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के लैंडपोर्ट में एक ही कैंपस के अंदर सभी जांच एजेंसियां, वाहन पार्किंग, हॉस्पिटल आदि की सुविधाएं मिलेंगी। 51 हेक्टेयर जमीन पर करीब पौने दो सौ करोड़ से लैंडपोर्ट बनेगा।
एसडीएम नौतनवा नवीन कुमार ने बताया कार्य प्रगति पर है। तय समय सीमा के अंदर काम पूरा हो जाएगा। अभी दो साल समय सीमा है।
नेपाल के साथ व्यापार में तेजी आएगी
सोनौली कस्बे के सुनील कुमार कहते हैं कि सोनौली बार्डर के समीप बन रहे इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट बौद्ध सर्किट का एक महत्वपूर्ण निकास बिंदु है। यह गौतम बुद्ध की जन्मस्थली और लोकप्रिय बौद्ध पर्यटन केंद्र लुंबिनी के करीब है। विदेश से आने वाले यात्रियों व पर्यटकों को सोनौली में अत्याधुनिक सुविधा का अहसास हो सके, इसी मापदंड पर लैंडपोर्ट विकसित किया जाएगा। निर्माण के बाद कस्टम, एसएसबी, पुलिस, आब्रजन सहित खुफिया एजेंसियों के कार्यालय एक ही कैंपस में रहेंगे। इससे जांच में सहूलियत मिलेगी। नेपाल के साथ व्यापार में तेजी आएगी।
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वर्ष 2004 में भारत सरकार ने आईसीपी को दी थी मंजूरी
भारत सरकार ने 2004 में भारत-नेपाल के सोनौली बॉर्डर पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के निर्माण मंजूरी दी थी, लेकिन भूमि के मुआवजे को लेकर पेच फंसा था। इसके बाद दूसरे स्थान पर आईसीपी बनाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए किसान तैयार हुए। इसके बाद करीब पौने दो सौ करोड़ से लैंडपोर्ट के लिए भूमि खरीदी गई है। इसका डीपीआर करीब 446 करोड़ का है। आईसीपी में इंजीनियरिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वास्तुकला और डिजाइन के बाद निर्माण हो रहा है।
चेकपोस्ट में होगी यह सुविधा
चेकपोस्ट में नेपाल व भारत की तरफ पैसेंजर के लिए इंट्रेंस, कार्गो के लिए इंट्रेंस, टर्मिनल बिल्डिंग, कार्गो टर्मिनल, क्वारंटीन बिल्डिंग, आयात व निर्यात के लिए वेयरहाउस, पब्लिक यूटिलिटी बिल्डिंग, इंट्रेंस फ्लाईओवर, कार्गो पार्किंग, वाहन पार्किंग, स्टाफ बैरक, ट्रांसशिपमेंट एरिया, रेस्ट रूम, फायर स्टेशन, मेंटिनेंस शेड आदि सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा

भारत-नेपाल के सोनौली सीमा पर भारत सरकार की तरफ से एयरपोर्ट की तर्ज पर 117 एकड़ कैंपस में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बनाई जा रही है। भूमि अधिग्रहण के बाद लैंडपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने चहारदीवारी का निर्माण का कार्य करीब पूरा कर लिया है। इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को रेलवे नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। जो भारत के बंदरगाह और सेज हाउस से माल लेकर सीधे चेकपोस्ट पहुचेंगे और कस्टम की प्रकिया पूरी होने के बाद कंटेनर को उसी रेल से नेपाल भेज दिया जाएगा।
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