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Maharajganj News: पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष आज से, पूर्वजों का लोग करेंगे तर्पण

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प्रतिपदा तिथि कल, 21 को अमावस्या को श्राद्ध के साथ होगा समापन
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गोरखपुर। पूर्वजों का तर्पण व पिंडदान करने का दिन पितृपक्ष पूर्णिमा श्राद्ध के साथ रविवार से शुरु हो रहा है। प्रतिपदा तिथि कल सोमवार को होगी। लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध व तर्पण उन्हें याद कर करेंगे। 21 सितंबर को अमावस्या के श्राद्ध के साथ पितृपक्ष का समापन होगा जिसमें तिथि अज्ञात पूर्वजों का तर्पण व पिंडदान किया जाएगा। इसके साथ ही 12 सितंबर को पंचमी व छठवीं दोनों तिथि पड़ रही है। इससे दो तिथियों में किए जाने वाले श्राद्ध एक की दिन होंगे।

गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि पूर्वजों के तर्पण से घर में सुख शांति बनी रहती है। पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। उनका कहना था कि श्राद्ध का अधिकार केवल पुत्र को है। यदि पुत्र नहीं है तो पौत्र, यदि पुत्र-पौत्र नहीं है तो पुत्री का पुत्र व यदि पुत्र और पुत्री दोनों पक्ष के लोग न हो तो परिवार का कोई भी उत्तराधिकारी कर सकता है। पितृ पक्ष के दौरान वस्तुओं की खरीदारी व सोने-चांदी की खरीदारी से बचना चाहिए। इन वस्तुओं की खरीदारी केवल दान देने के लिए ही करना चाहिए। वहीं बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान श्राद्ध नहीं करना चाहिए। पितृपक्ष में कोशिश करनी चाहिए कि जिस तिथि में पूर्वज की मृत्यु हुई है, उसी तिथि में बाल बनवाना चाहिए। पिंडदान कर ब्राह्मण को भाेजन कराकर उचित वस्तुओं का दान करना चाहिए। घरों में सात्विक भोजन बनाना चाहिए।
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इस दिन होंगे श्राद्ध

7 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 8 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध ,9 सितंबर को द्वितीया, 10 सितंबर को तृतीया श्राद्ध, 11 सितंबर को चतुर्थी श्राद्ध, 12 सितंबर को पंचमी और षष्ठी श्राद्ध, 13 सितंबर को सप्तमी श्राद्ध, 14 सितंबर को अष्टमी श्राद्ध, 15 सितंबर को नवमी श्राद्ध, 16 सितंबर को दशमी श्राद्ध, 17 सितंबर को एकादशी श्राद्ध, 18 सितंबर द्वादशी का श्राद्ध, 19 सितंबर को त्रयोदशी का श्राद्ध, 20 सितंबर को चतुर्दशी श्राद्ध, 21 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध पितृ विसर्जन होगा।
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