महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध गोदामों से तस्करी का खेल काफी पुराना है। धंधेबाजों ने ऐसे क्षेत्रों में गोदाम बना रखे हैं जहां किसी की नजर नहीं पड़ती है। इसका फायदा उठाते हुए तस्कर सीमावर्ती क्षेत्र से पिकअप पर लहसुन लादकर आगे बढ़ गया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बॉर्डर पर बरामदगी के दौरान ही धंधेबाजों के कारनामों की जानकारी होती है। इसमें भी केवल कैरियरों तक ही जिम्मेदार पहुंच पाते हैं। मुख्य सरगना हर बार पकड़ से दूर होते हैं। बड़ी मंडियों से सरगना अपना काम करते रहते हैं। पकड़ में आने के बाद किनारा कस लेते हैं।
सूत्रों की माने तो सीमावर्ती गांव में तस्करों ने अवैध गोदाम बना रखे हैं, जहां नेपाल से साइकिल और बाइक से लाकर डंप करते हैं। वहां से बड़े वाहनों पर लोडकर गोरखपुर और कानपुर मंडी भेज दिया जाता है। मंडी में पहुंचने पर चीन के लहसुन की पहचान संभव नहीं हो पाती है, जिसके कारण यह आसानी से खप जाता है।
चीनी लहसुन की तस्करी से जहां धंधेबाज मोटा रकम कमा रहे हैं। वहीं भारतीय लहसुन का भाव चढ़ने की वजह से आम लोगों की जेब ढीली हो रही है। भारतीय लहसुन का भाव 320 रुपये हो गया है, जबकि चाइनीज लहसुन सीमावर्ती बाजार में 260 रुपये किलो में आसानी से उपलब्ध है। बीते दिनों हुई लहसुन की बरामदगी यह भी बयां कर रही है। चीनी लहसुन की तस्करी तेजी से हो रही है।