समितियों पर उपलब्ध नहीं खाद, भटक रहे किसान
निचलौल (महराजगंज)। रबी फसलों की बुआई के समय किसानों को जरूरत पर खाद न मिले तो उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इन दिनों बुआई का सीजन अपने चरम सीमा पर है। लेकिन, समितियों पर ताला लटक रहा है। उन्हें आसानी से खाद नहीं मिल पा रही है। किसान खाद के लिए इधर- उधर भटक रहे हैं। इससे गेहूं सहित अन्य फसलों की बुआई बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रही है।
किसानों का मानना है कि फसलों की बुआई में जितनी देरी होगी उतना ही उपज पर प्रभाव पड़ेगा। क्षेत्र के मदनपुरा निवासी किसान शंकर सहानी ने कहा कि धान की कटाई के बाद रबी की गेहूं सहित अन्य फसलों की बुआई का समय अपने चरम सीमा पर है। फसलों की बुवाई के लिए डीएपी व सुपरफास्फेट की जरूरत है। लेकिन समितियों पर नियमित खाद उपलब्ध न होने के चलते उन्हें समितियों का चक्कर लगाना पड़ रहा हैं। फिर भी उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। खोन्हौली निवासी शेषमणि पटेल ने कहा कि फसलों की बुआई का सीजन धीरे-धीरे गुजरता जा रहा है। इससे उनके माथे पर चिंता की लकीरें पड़ रही हैं। डीएपी, सुपर फॉस्फेट न मिलने पर उनकी बुआई पिछड़ रही है। आरोप है कि कुछ समितियां ऐसी है जहां पर कब खाद आती है कब समाप्त हो जाता है। किसानों को पता ही नहीं चल पाता है। मिश्रवलिया निवासी किसान इजहार अली ने कहा कि जिम्मेदारों द्वारा विकासखण्ड क्षेत्र के महज चार साधन सहकारी समिति रुद्ररौली, गडौरा,ठूठीबारी और अरदौना पर खाद वितरण किया जा रहा है। जिसमें से अधिकांश समितियां अक्सर बंद रहा रही है। रुद्ररौली समिति के सचिव अजय शंकर तिवारी ने कहा कि खाद सोमवार दोपहर बाद समिति पर पहुंची है। जिसके चलते वितरण नहीं हो सका है। मंगलवार को खाद वितरण किया जाएगा। वही अरदौना समिति के सचिव निजामुद्दीन ने कहा कि तीन दिन पहले खाद का वितरण हुआ है। सोमवार को खाद के लिए आरटीजीएस किया गया है। खाद आने के बाद वितरण होगा। जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने कहा कि समितियों द्वारा आरटीजीएस करने के एक दो दिन बाद समिति पर खाद उपलब्ध करा दी जाती है। जहां पर नियमित खाद नहीं पहुंच पा रही है। वहां पर खाद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।