लक्ष्मीपुर। क्षेत्र के ग्राम पंचायत बनरसिहा कला में जनवरी 2024 से चल रहे उत्खनन कार्य को शुक्रवार को बंद कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर कार्य बंद किया जा रहा है।
पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि प्राचीन स्थल से जो भी पुरावशेष मिले हैं उसमें से सभी महत्वपूर्ण अवशेषों को विभागीय अधिकारियों को सौंपी जाएगी। साथ ही मिले खंडित अवशेषों सहित अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं पर डायरी तैयार की गई है। उत्खनन में मिले अवशेषों को टैगिंग बैग में सील किया जा रहा है। शासन से स्वीकृति मिली तो अगले वित्तीय वर्ष में पुनः उत्खनन शुरू किया जाएगा। अब तक जो अवशेष मिले हैं वह करीब ढाई हजार साल पहले के बताए जा रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्राचीन काल में जो लोग निवास कर रहे थे उनका धर्म, संस्कृति व परंपरा बौद्ध धर्म से ही प्रभावित लग रहा है। फिलहाल यहां मिल रहे पुरावशेषों की गहन जांच के बाद ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। पुरातत्वविदों को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष के उत्खनन में बनरसिहा कला के टीके में छुपे रहस्यों से पर्दा उठेगा। अधिक संख्या में मिट्टी के जल पात्र मिले हैं।
जानकारी के मुताबिक अब तक मिट्टी के नाद व हण्डी, पानी भंडार करने का एक विशाल जलपात्र, रिंग वेल मिले है। दूसरी तरफ चौड़ी, चौंडी दीवारें, मृदभांड पुरावशेष भी मिले है। उसमें जो पुरावशेष व दीवारें मिली हैं व सभी अवशेष अति प्राचीन बताई जा रही हैं। पु
इतिहासकारों को उम्मीद है कि ऐसा प्रतीत होता है कि यहां बौद्ध संस्कृति व परंपरा को मानने वाले लोग निवास कर रहे थे। जो हजारों वर्षों तक यहां निवास किए थे।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि उत्खनन में टीम को लगातार मिट्टी के बर्तन और कुषाण काल के पुराने ईंट ही निकल ही रहे हैं। वर्तमान में मिट्टी के नाद, हण्डी, वर्तन, जल पात्र आदि मिल रहे हैं। दर्जनों रिंग वेल मिले हैं। जिनका संबंध कुषाण काल से लग रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग का सुसज्जित नगर था। जोकि अब से दो हजार वर्ष पहले का है।