महराजगंज। बेसिक शिक्षा विभाग का जोर नामांकन बढ़ाने पर अधिक है, लेकिन स्कूलों तक सभी सेट की किताबें पहुंच सकें इसकी कारगर व्यवस्था नहीं बनाई गई। जिले में जहां कक्षा एक से तीन तक की किताबें ही अभी नहीं पहुंची हैं।
वहीं कक्षा 4 से 8वीं तक की सभी किताबें स्कूलों तक नहीं पहुंच सकी हैं। जबकि शिक्षा सत्र का पहला महीना अप्रैल जहां समाप्त हो गया है वहीं मई में भी 10 दिन बीत चुके हैं।
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से 1705 स्कूलों का संचालन है। पिछले वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक 2.48 लाख बच्चे इनमें पंजीकृत हैं। इस बार कक्षा एक से लेकर तीन तक की किताबें एनसीईआरटी की पढ़ाई जानी है। इसके लिए वर्क आर्डर निर्धारण विलंब से होने के चलते अप्रैल में गया। अभी यह किताबें जनपद में नहीं पहुंच सकी हैं।
वहीं कक्षा चार से लेकर आठवीं तक की किताबें जो मार्च में ही जिले में पहुंची उनके सभी सेट अबतक स्कूलों तक नहीं पहुंचाए जा सके हैं। स्थिति यह है कि किताबें होते हुए भी शिक्षक या तो पुरानी किताबों से ज्ञान बांट रहे हैं अथवा सिर्फ वही विषय पढ़ा रहे हैं जिनके सेट पहुंच चुके हैं।
पहले बीआरसी से किताबों को ले जाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती थी, जिसमें लेटलतीफी हो जाती थी। इसे देखकर इस बार राज्य स्तर से ही स्कूल तक किताब पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया से फर्म चयनित किए गए थे। संबंधित फर्म के कर्मचारियों की जिम्मेदारी थी कि वह स्कूलों में नामांकन के मुताबिक सभी सेट स्कूलों तक पहुंचाएं, लेकिन यह व्यवस्था फेल साबित हो रही है और स्कूलों तक सभी विषयों के सेट अभी तक नहीं पहुंचे हैं। शिक्षकों का कहना है कि पहले बीआरसी से किताबें किसी एक शिक्षक को भेजकर मंगा लेते थे, लेकिन इस बार व्यवस्था बदलाव के कारण इंतजार करना मजबूरी है।