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Maharajganj News: ब्रांडेड के नाम की डुप्लिकेसी...मर्ज बढ़ा रहीं दवाएं

Thu, 26 Dec 2024 08:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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नगर में दवाई की दुकान से दवा लेते लोग।
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महराजगंज। बाजार में ब्रांडेड कंपनी के नाम पर मिलते-जुलते नाम की दवा धड़ले से बिक रही है। इसके सेवन से बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती है, लेकिन धंधेबाजों की चांदी रहती है। इससे वे मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। जबकि मरीजों की जेब ढीली हो रही है।
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इसे पूरे खेल में सबसे अधिक नुकसान मरीज का होता है। पहले तो सेहत जल्दी ठीक नहीं होती है, दूसरे रकम भी अधिक खर्च होती है। करोड़ों के इस खेल पर जिम्मेदार भी अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इन सब स्टैंडर्ड दवाओं से सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इनसे मरीजों में प्रतिरोध पैदा हो जाने से उनका असर ही खत्म हो जाता है।
शहर के बाजार में पड़ताल के दौरान गैस की दवा ओमेज एक मरीज ने मांगी तो केमिस्ट ने उसे ओमी नाम की दवा पकड़ा दी। दवा खरीदने वाले ने कुछ कहा तो दुकानदार से उसे इस दवा की खूबियां बतानी शुरू कर दी। चार पत्ता दवा खरीदने पर पांच रुपये कम भी कर दिया।
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दवा की मंडी में ऐसी दवाएं अधिक मात्रा में उपलब्ध बताई जा रही हैं। रेट में दोगुने से तीन गुने का अंतर है। ब्रांडेड बेचने से उतना फायदा नहीं होगा जितना मिलते जुलते नाम की दवा बेचने से फायदा होगा। ऐसी दवा अगर एक लाख की मंगाई जाती है तो सीधे दो से तीन लाख रुपये का फायदा होता है। सिप्रोबिड के जगह सिपोडेक 500 बाजार में मिल रहा है। इसी तरह से बेटाडीन की जगह पर सिप्लाडीन मिल रहा है। इसे देखकर सामान्य आदमी समझ नहीं पाएगा। सेलकॉल से मिलता जुलता सीपकॉल बाजार में हैं। यह कैल्सियम की दवा है। इसे इन दिनों में जमकर खपाया जा रहा है।
कैडिला कंपनी स्कीन साइन इसी नाम से एक दवा बाजार में आई है, उसकी स्पेलिंग आई की जगह ई कर दी गई। यह चेहरे पर लगाने वाली क्रीम है। डेक्साेरेंज सीरप की जगह पर एक दूसरा सीरप डेक्सोवेंज नाम से बिक रहा है। पैकिंग में कुछ खास अंतर नहीं है। इसे भी हर कोई समझ नहीं पाएगा। लोवेट जीएम की तरह से क्रोवेटा जीएम-दाद खाज खुजली की दवा बाजार में हैं। ऐसी दवाओं के वास्तविक रेट में बहुत अंतर है। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की कंपनियों में बनीं ये दवाएं भी ब्रांडेड के आसपास के ही रेट पर बिकती हैं। असल में दवा खाने वाले को कोई खास नुकसान नहीं होता, इसलिए इसकी कोई शिकायत भी नहीं करता।
पिछले दिनों भारत सरकार की तरफ से कराई गई जांच में 50 से अधिक दवाएं सब स्टैंडर्ड पाई गई थीं। इसके बाद ड्रग विभाग ने यहां की दुकानों की छानबीन शुरू कराई। सूत्रों की मानें तो कई ब्रांडेड कंपनियों का डी माल गोरखपुर आ रहा है। यहां से इन दवाइयों को सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिक खपाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कई कंपनियों की ऐसी दवाएं बाजार में हैं, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्र के बाजार में भेजकर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
शिकायत लेकर भी नहीं आता कोई : मार्केट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि हरियाणा से आने वाली दवाइयों में सबसे अधिक हिस्सा एंटीबायोटिक्स दवाइयों का है। क्योंकि, इनकी बिक्री अधिक होती है और अच्छी कंपनी की दवाओं की कीमत भी अधिक रहती है।
दूसरे नंबर पर ताकत बढ़ाने वाली दवाइयां हैं, जिनकी आपूर्ति हिमाचल प्रदेश की कंपनियों से होती है। इनका फायदा यह है कि ये मनमाने कीमत पर बिकती हैं और दवा बेअसर होने की कोई शिकायत लेकर भी नहीं आता।

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

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