31 साल बाद भी रेल सेवाओं से नहीं जुड़ पाया जिला मुख्यालय
2 अक्तूबर 1989 में महराजगंज बना जिला
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। 31 साल से जिला मुख्यालय रेल सुविधाओं ने वंचित है। यहां अब तक उम्मीदों में रेल दौड़ रही है। लंबे इंतजार के बाद भी लोगों का यह सपना पूरा नहीं हो सका। हर साल चुनाव में यह मुद्दा भी बना, लेकिन नजीता शून्य रहा। जिले के घुघली, सिसवां नौतनवा, फरेंदा कस्बे तक तो बहुत पहले से ही रेल दौड़ रही है, लेकिन अब मुख्यालय तक रेल की पटरियां नहीं बिछ सकीं। वर्षों से अटकी महत्वपूर्ण घुघली-महराजगंज-आनंदनगर रेल परियोजना को 2018-19 में मंजूरी मिली, लेकिन फाइल दबकर रह गई। इसके लिए कारगर पहल नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार महराजगंज 2 अक्तूबर 1989 को जिला बना था। आज 31 साल हो चुके, लेकिन रेल मार्ग से जोड़ने की मंशा अधूरी रह गई। वर्ष 2012-13 के रेल बजट में घुघली-फरेंदा रेल खंड को मंजूरी मिली थी। उस समय 10 लाख की टोकन मनी भी परियोजना के लिए आवंटित हुई थी। इसके बाद रेल प्रशासन ने घुघली से महराजगंज तक दो बार सर्वे कराया। सर्वें में स्टेशन बनाने के लिए जमीन का भी चयन हुआ, लेकिन नतीजा शून्य रहा। रेल मार्ग से जोड़ने की योजना हवाहवाई साबित हुई। प्रस्ताव में बताया गया था कि आनंदनगर घुघली वाया महराजगंज प्रस्तावित रेल लाइन की दूरी 50 किमी की है। पांच रेलवे स्टेशन बनाने की योजना थी। घुघली रेलवे स्टेशन को जंक्शन बनाने का प्रस्ताव था। चौतरवा, पकड़ी नौनिया, महराजगंज, शिकारपुर व हरपुर में नए रेलवे स्टेशन बनाने की व्यवस्था के साथ ही घुघली-आनंदनगर रेल खंड पर 46 पुल बनाने के लिए रूप रेखा बनी थी। जैसे-जैसे समय बीतते गया सब कुछ फाइलों में ही सिमट कर रह गया।
उदासीनता के कारण मुख्यालय रेल मार्ग से नहीं जुड़ सका
जिले के साथ सरासर अन्याय है। जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण अब तक जिला मुख्यालय रेल मार्ग से नहीं जुड़ पाया, जिससे महराजगंज के विकास की गति धीती है। अगर रेलवे से जिला मुख्यालय जुड़ा रहता तो व्यापार में वृद्धि होती, रोजगार के अवसर मिलते। सबसे ज्यादा समस्या व्यापारियों को बाहर से सामान मंगाने में होती है। साल दर साल गुजर गए, लेकिन रेल जिला मुख्यालय पर नहीं आई।
विजय जायसवाल, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
नहीं हुए कारगार प्रयास
जिला मुख्यालय को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए जनप्रतिनिधियों ने कारगर प्रयास नहीं किया। वर्ष 2008 से ही जनसूचना अधिकार को हथियार बनाकर संर्घष शुरू किया, जिसका परिणाम रहा की वर्ष 2012-13 के सर्वे में नई रेल परियोजना को शामिल किया गया। लेकिन इसके बाद ही कारगर पहल नहीं हुई। क्षेत्रवासियों के लिए यह सपना ही रह गया। 80 वर्ष का जीवन पूरा हो चुका। अब तो उम्मीद भी टूट गई है कि जिला मुख्यालय रेल आएगी।
दयानंद गुप्ता, सेवानिवृत्त, सर्वेक्षण निरीक्षक
जिले में विकास को गति देने के लिए हर संभव प्रयास किया गया। लोगों की उम्मीद को पूरा करने के लिए प्रयास में कहीं लापरवाही नहीं हुई। वह दिन दूर नहीं जब जिला मुख्यालय भी रेल मार्ग से जुड़ जाएगा। संसद में भी इसके लिए आवाज उठाई गई। साथ ही हर संभव प्रयास हुआ। इसके साथ सार्थक परिणाम आने की उम्मीद है।
पंकज चौधरी, सांसद