बागापार। प्राचीन शिव मंदिर कटहरा में चल रहे रामलीला मंचन के आठवें दिन शनिवार की रात राम-केवट संवाद सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। केवट संवाद प्रसंग का मंचन देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए। रामलीला में सुमंत ने प्रभु श्रीराम से 14 दिन बाद घर जाने के लिए आग्रह किया तो राम ने मना कर दिया। यह सुनकर राम आगे बढ़े, सुमंत वापस अयोध्या आ गए। उधर, भगवान श्रीराम सरयू नदी के किनारे खड़े केवट से नदी पार करने के लिए नाव में बिठाने का आग्रह करने लगे। निषादराज ने आदर सत्कार कर बस्ती में रुकने का प्रभु श्रीराम से आग्रह किया लेकिन प्रभु राम ने पिता के वचनों से बंधे होने की बात कहीं। अगले दिन प्रात: निषादराज राम, लक्षमण और सीता को गंगा की ओर चलते हैं।
श्रीराम गंगा तट पर सुमंत को अयोध्या लौट जाने को कहते हैं। गंगा के पार जाने के लिए राम केवट से याचना करते हैं। लेकिन केवट यह कहते हुए मना कर देते हैं कि कहीं आपके चरणरज का स्पर्श पाकर नाव नारी न बन जाए। केवट राम से चरण धोकर नाव में बैठाने की शर्त रखते हैं। केवट प्रभु राम के चरणरज को धोकर पीते हैं। केवट राम, लक्षमण और सीता को गंगा पार कराते हैं। राम केवट को गंगा पार करने की मुद्रिका के रूप में अंगूठी देते हैं लेकिन केवट यह कहकर मना कर देते हैं कि आज आप मेरे घाट पर आए तो मैंने आपको पार उतारा, जब मैं आपके घाट आऊं तो आप मुझे भवसागर से पार लगा देना। केवट की यह बात सुनकर राम आशीर्वाद देकर आगे बढ़ जाते हैं। राम-केवट संवाद की लीला मंचन देकर दर्शक प्रभु राम के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठता है।