फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परीक्षाओं के बावजूद कोरोनारोधी टीका लगवाने केंद्रों पर पहुंच रहे किशोर

विज्ञापन
विज्ञापन
परीक्षाओं के बावजूद कोरोनारोधी टीका लगवाने केंद्रों पर पहुंच रहे किशोर
विज्ञापन

महराजगंज। किशोरों को टीका लगवाने में कहीं तेजी तो कहीं सुस्त गति है। परीक्षाओं के बावजूद किशोर टीका लगवाने केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। जिले में 50 केंद्रों पर कोरोनारोधी टीका लगाने के साथ ही स्कूलों में जरूरत के अनुसार टीम भेजकर टीका लगवाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को शुरूआत में तो थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन अब समस्या दूर हो गईं है। 12-14 वर्ष के किशोरों को टीका लगवाने की गति लक्ष्य से काफी पीछे है, वहीं 15-18 वर्ष के किशोरों को टीका लगवाने की गति लक्ष्य के करीब पहुंच रही है। इन सभी को पहला डोज लगाया गया है। दूसरा डोज समय से लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण को शुरू हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। 12 वर्ष से अधिक उम्र के किशोरों को इस अभियान में जोड़ा गया। शुरुआत में लोग टीका लगवाने से डरते-झिझकते रहे लेकिन सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने टीके के प्रति भ्रांतियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाई। 15 से अधिक आयु वर्ग वाले अधिकांश लोग खुद को प्रतिरक्षित कर चुके हैं। उनसे प्रेरित होकर 12-14 वर्ष की आयु वाले 4,890 किशोरों को टीका अब तक लग चुका है, जबकि 1,13,723 किशोरों को टीका लगाने का लक्ष्य है। 15-17 वर्ष के कुल 1,88,294 किशोरों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 1,51,131 को टीका लगाया जा चुका है।
विज्ञापन

जागरुकता से दूर हुआ भ्रम
बीते वर्ष जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण अभियान में पहले हेल्थ वर्कर, फ्रंट लाइन वर्कर्स, बुजुर्ग और फिर 18 वर्ष से अधिक आयु वालों को जोड़ा गया। इस वर्ग के ज्यादातर लोगों के टीका लगवाने के बाद जब इसी साल तीन जनवरी से 15-17 वर्ष की आयु वालों का टीकाकरण शुरू किया गया तब तमाम तरह की भ्रांतियां फैलाई गईं। इसका असर रहा कि अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगवाने में हिचकते रहे। बाद में सामाजिक, धार्मिक संगठनों व शिक्षण संस्थाओं ने लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। उनके आगे आने के बाद न सिर्फ डर दूर हुआ बल्कि टीकाकरण को भी रफ्तार मिली।
शुरुआती दिनों में कोरोनारोधी टीका के प्रति लोग थोड़ा हिचके, लेकिन जागरूकता का ऐसा असर हुआ कि सभी टीका लगवाने लगे। सभी के सहयोग से ही टीकाकरण अभियान में तेजी आई। टीके से डरने की आवश्यकता नहीं है। कोरोना से बचाव के लिए टीका जरूरी है। डॉ. केपी सिंह, अधीक्षक, सदर सीएचसी
कोरोनारोधी टीका सभी लगवाएं, इसके लिए लोगों को जगह-जगह बैठक करके जागरूक किया जाता रहा है। कोरोना से बचाव का टीका सभी जाति-धर्म के लोगों को लगवाना चाहिए। यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है। इससे कोई भी परेशानी नहीं होती। पूर्व में टीका के प्रति जागरूक करने के लिए मुहिम भी चलाई गई थी, जिसका लाभ भी हुआ। -पंडित दिवाकर मणि
संगठन ने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कोरोनारोधी टीका लगवाने के फायदों को बताया। बच्चों को भी टीका के लिए आगे आने की अपील की जाती रही है। सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि वे बच्चों के हित को देखते हुए उन्हें टीका जरूरी लगवाएं। -डॉ. शांति शरण मिश्र, मिडिया प्रभारी, सिटिजन फोरम
विज्ञापन

मैंने चार पूर्व कोरोनारोधी का टीका लगवाया। ऐसा लगा जैसे कि कोरोना से लड़ाई में एक बड़ा हथियार मिल गया। सभी भाई-बहनों से अपील है कि वे भी टीका केंद्र पर जाकर टीका अवश्य कराएं।-अमृता वर्मा, छात्रा मेडिकल
टीकाकरण की प्रगति
12-14 वर्ष-लक्ष्य-1,13,723-लगा टीका--4,890----शेष 1,08,833
15-17 वर्ष-लक्ष्य-1,88,294-लगा टीका--1,51,131--शेष 37,163
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें