महराजगंज। लड्डू उस मिठाई का नाम है जो न सिर्फ हर मौसम में दुकानों से खूब बिकती है, बल्कि अर्से से बिकने वाली इस मिठाई ने कुछ दुकानों को एक अलग पहचान दी। मिठाई की दुकानों पर सबसे अधिक बिक्री लड्डू की है, क्योंकि यह न सिर्फ सदैव ताजे प्राप्त किए जा सकते हैं, बल्कि रेट भी अन्य मिठाइयों की तुलना में कम रहता है।
रेट और स्वाद की जुगलबंदी के सहारे इसने अमीर-गरीब सभी की जुबान पर कब्जा कर रखा है। मिठाइयों के बाजार में लगभग छह से अधिक तरह के लड्डू बिक रहे हैं, लेकिन सर्वाधिक सामान्य दाने का लड्डू मंदिर में ईश्वर के भोग के लिए तो गोंद ड्राईफ्रूट के मिश्रण वाला लड्डू लोग परिवार को खाने के लिए अधिक खरीद रहे हैं।
फरेंदा हाईवे के किनारे संवारे और सत्तन दो ऐसे दुकानदार हैं जिनकी दुकान बहुत छोटी है, जिसे आधुनिक नहीं कहा जा सकता यह चाय, पकौड़ी, समोसा भी नाश्ते के रूप में बेचते हैं, लेकिन इन दुकानों की पहचान सिर्फ लड्डू की मिठाई से है। किसी मंदिर में मिष्ठान चढ़ाना है अथवा छोटे कथा, भागवत, रामायण व सूक्ष्म पारिवारिक आयोजन लड्डू इन्हीं की दुकान से मुख्यालयवासी खरीदते हैं।
संवारे व सत्तन के मुताबिक वह 25 से 30 किलो सामान्य लड्डू हर दिन बनाते हैं जिसे छोटी बूंदी से निर्मित होता है। शाम चार से पांच बजे तक पूरा बिक जाता है। दुकान का एक ही रेट है 200 रुपये किलो इसमें ताजा बूंदी, चीनी सीरा व छोटी इलायची का उपयोग होता है।
मिष्ठान से पहचान बनाने वाले बड़े कारोबारी कामेश्वर जायसवाल ने बताया कि उनके यहां लड्डू की कई किस्म बिकती है, लेकिन सामान्य लड्डू के बाद सर्वाधिक बिक्री गोंद व ड्राईफ्रूट से तैयार लड्डू की होती है जिसका रेट एक हजार रुपये प्रति किलो है और इसे देशी घी में तैयार किया जाता है। सामान्य दिनों में यह उनके यहां से 10 से 15 किलो तक बिक जाता है। लग्न में सामान्य लड्डू अधिक बिकता है। बेसन का लड्डू 300, अंजीर लड्डू 700, खोआ काजू, पिस्ता लड्डू 1300 के साथ शुगर फ्री लड्डू भी उनकी दुकान से अधिक बिकता जो 600 रुपये किलो है। इसमें चीनी की जगह मिठास शहद से लाई जाती है।